देहरादून के डाक्टरों ने 103 साल के रोगी के कूल्हे का वाल्व सफलतापूर्वक बदल दिया है। डाक्टर यह केस गिनीज और लिम्का बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किए जाने का वह दावा करेंगे।
103 साल के ब्रह्मदत्त शर्मा के कूल्हे का वाल्व बदला गया है। दस दिन पहले वह गिर गए थे जिससे नेक फीमर फ्रेक्चर हो गया।
पहली बार हुआ
रोगी की सर्जरी करने वाले वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डा हरीश कोहली ने पत्रकारों को बताया कि उनकी प्रैक्टिस में इतने उम्र के रोगी के वाल्व प्रत्यारोपण का यह पहला केस है।
यह केस गिनीज और लिम्का बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किए जाने का वह दावा करेंगे। डा कोहली ने बताया कि वाल्व प्रत्यारोपण की सर्जरी उन्होंने 28 मिनट में की थी।
बेटी 72 की
इस मौके पर बुजुर्ग रोगी शर्मा ने वॉकर की मदद से चलकर दिखाया। रोगी शर्मा की 72 वर्षीय पुत्री निर्मला देवी ने बताया कि उनके पिता जालंधर में पैदा हुए थे।
इसके बाद देहरादून आ गए। वह ईसी रोड डालनवाला में रहते हैं। उनकी उम्र की तस्दीक करने के लिए डा कोहली ने ब्रहमदत्त शर्मा पुत्र बरकत शर्मा के आधार कार्ड और पेन कार्ड की फोटोप्रति भी मीडियाकर्मियों को दी। इन दोनो में ब्रह्मदत्त शर्मा की उम्र 14 सितंबर 1910 दर्ज है।