घर में आग लगने से डरी एक युवती अपने बच्चे के साथ ससुराल से मायके के लिए निकल पड़ी। लेकिन रास्ते में उसने जिस युवक से मदद मांगी, उसी ने उसकी अस्मत को तार-तार कर दिया।
फिर उसने 9 हजार रुपये में उसे किसी दूसरे को बेच दिया। सात दिन में उसे दो लोगों के हाथ बेचा गया। एक दूधवाले की मदद से परिजन युवती को घर लाए। लेकिन परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
बुलंदशहर के सर्राफा बाजार निवासी एक व्यापारी की 23 वर्षीय पत्नी सुनीता (परिवर्तित नाम) के कमरे में सात जून को मोमबत्ती से आग लग गई। ससुराल वालों के नाराज होने के भय से दो माह की बच्ची को लेकर वह घर से अपने मां-बाप के पास जाने के लिए निकल गई।
मदद के नाम पर धोखा
उसने रास्ते में एक युवक से लिफ्ट मांगी। गाजियाबाद जिले के मंसूरी निवासी युवक ने उसे बैठा लिया। बातचीत के दौरान सुनीता ने अपनी व्यथा बताई।
युवक सुनीता को अपने घर ले गया और उसकी अस्मत लूट ली। इसके बाद दूसरे दिन उसने सुनीता को जसौरा गांव निवासी बबलू को नौ हजार रुपये में बेच दिया। बबलू के परिजनों ने धोखे से महिला की बबलू से शादी करने की भी कोशिश की।
शादी की तैयारियां भी शुरू हो गई। लेकिन घर में मांस बनता देख महिला को शक हुआ तो उसने शादी का विरोध किया। इसके बाद बबलू ने महिला का सौदा उदासरा गांव के एक गुर्जर से इक्कीस हजार में कर लिया। गुर्जर ने भी उसकी अस्मत लूटी।
दूध बेचने वाले ने की मदद
इस बीच दूध बेचने वाले एक शख्स ने सुनीता को गुर्जर के घर पर देखा। जब उसने एक समाचार पत्र में सुनीता की गुमशुदगी की खबर देखी तो उसने तत्काल सुनीता के परिजनों को उसकी सूचना दी।
सूचना पाकर सुनीता के घरवाले 14 जून को गुर्जर के घर पहुंचे। गुर्जर ने सुनाती को छोड़ने के एवज में पैसों की मांग कर दी। मामला पुलिस के सामने ले जाने की बात पर गुर्जर डर गया और सुनीता को उसके परिजनों को सौंप दिया।
परिजनों ने पूरी घटना की शिकायत पुलिस से की लेकिन लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिजन अब आईजी से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस बीच सुनीता का पति जब उसे घर ले गया तो उसके परिजनों ने बदनामी की बात कहकर उसे घर में जगह नहीं दी।