कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में कुछ दबंगों ने एक विधवा को निर्वस्त्र करके बेरहमी से पीटा।
शिकायत करने थाने पहुंची महिला को पुलिस ने बेइज्जत कर भगा दिया। महिला ने एडीएम से पहले दूरभाष पर फिर लिखित शिकायत दर्ज कराई। मगर एडीएम के निर्देश पर भी पुलिस के कानों पर जूं नहीं रेंगी। लाचार महिला और उसके बच्चे सहमे हुए हैं।
संग्रामपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में मंगलवार को कुछ प्रभावशाली लोगों ने एक विधवा महिला के कपड़े फाड़ डाले और लात-घूंसों से उसे बुरी तरह पीटा।
महिला का 'कुसूर' सिर्फ इतना था कि वह अपने बाग में दबंगों की ओर से कराए जा रहे अवैध निर्माण का विरोध कर रही थी।
शोर सुनकर अन्य ग्रामीण आए और महिला को दबंगों के चंगुल से छुड़ाया। उन्होंने तन ढंकने को चादर देकर घर उसे पहुंचाया।
महिला हिम्मत जुटाकर संग्रामपुर थाने गई तो पुलिसकर्मियों ने उसे डांटकर भगा दिया। महिला ने एडीएम माताफेर को फोन करके आपबीती सुनाई।
इसके बाद संग्रामपुर थाने की टीकरमाफी पुलिस चौकी का सिपाही श्यामधर उसके गांव गया। मगर सिपाही ने पुलिसिया अंदाज में पीड़िता को हड़काते हुए चौकी पर तलब किया।
इस पर पीड़िता पुलिस चौकी जाने के बजाय एडीएम माताफेर से मिली और लिखित शिकायत की। एडीएम ने थानाध्यक्ष संग्रामपुर को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बावजूद पुलिस कार्रवाई के प्रति गंभीर नहीं दिख रही है।
महिला का कहना है कि 20 मार्च को वह अपने नलकूप से घर लौट रही थी तब भी दबंगों ने उससे छेड़खानी की थी। इसकी शिकायत उसने संग्रामपुर पुलिस को दी थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
पुलिस अधीक्षक अलंकृता सिंह का कहना है कि विधवा के आरोप गंभीर हैं। हालांकि उसने जिन लोगों पर आरोप लगाए हैं, उनमें उसके परिजन भी शामिल हैं। फिलहाल महिला एसओ को मामले की जांच सौंपी गई है। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, संग्रामपुर के थानाध्यक्ष संतोष कुमार यादव कहते हैं कि महिला आए दिन ऐसे आरोप लगाती रहती है। हालांकि उन्होंने महिला के साथ मारपीट होने की बात को स्वीकार किया। मारपीट के मामले में की गई कार्रवाई के सवाल पर थानाध्यक्ष चुप्पी साध गए।