डेंगू, मलेरिया के खतरे के बीच अब जीका वायरस को लेकर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट पर है। वाराणसी और आसपास के जिलों में मरीज तो नहीं मिला, लेकिन कानपुर में प्रदेश का पहला मरीज मिलने पर काशी में बेचैनी बढ़ गई है। जीका वायरस के लक्षण भी डेंगू, मलेरिया से मिलते जुलते हैं। स्थानीय स्तर पर संक्रमण से बचाव के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
जीका वायरस को लेकर आईएमएस बीएचयू के मालीक्यूलर बायोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर सुनीत कुमार सिंह ने शोध भी किया है। प्रो. सुनीत के अनुसार डेंगू की तरह ही जीका वायरस भी एडीज मच्छर से फैलता है। सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह वायरस मस्तिष्क के सुरक्षा कवच यानी ब्लड ब्रेन बैरियर को भेदते हुए कोशिकाओं तक पहुंच जाता है।
इसमें डेंगू, मलेरिया की तुलना में संक्रमण बढ़ने की संभावना अधिक रहती है। बताया कि शोध में दवा के निर्माण के बारे में भी बताया गया था। देश भर में इस साल अब तक 65 मामले आ चुके हैं।
प्रो. सुनीत कुमार सिंह ने बताया कि हल्का बुखार, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द आदि जीका वायरस के लक्षण है। यह लक्षण 3 से 14 दिन के भीतर दिखते हैं। शुरुआत में ही लक्षणों की जानकारी मिल जाए तो इलाज और जरूरी जांच कराकर इसके प्रभाव से बचा जा सकता है।
जिले में अभी जीका वायरस का कोई मरीज तो नहीं है, लेकिन कानपुर में मरीज के मिलने के बाद सतर्कता बढ़ा दी गई है। डेंगू, मलेरिया नियंत्रण में लगी टीम को इससे बचाव के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया गया है।
- डॉ. वीबी सिंह, सीएमओ