उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में पुनः न्यायालय द्वारा शिक्षकों के पक्ष में निर्णय देते हुए वेतन भुगतान के निर्देश दिए गए, लेकिन तत्कालीन डीआईओएस उपेंद्र कुमार के कार्यकाल में वेतन जारी करने के लिए करीब 25 लाख रुपये की मांग की गई। आंशिक भुगतान के बाद भी वेतन फिर से रोक दिया गया। बाद में उपेंद्र कुमार के अवकाश पर जाने के दौरान कार्यभार संभालने वाले अधिकारी वीरेंद्र प्रताप सिंह ने वेतन भुगतान शुरू कराया, लेकिन उपेंद्र कुमार के वापस आने पर फिर भुगतान रोक दिया गया।
बताया गया कि 31 जनवरी 2026 को जेडी कार्यालय में हुए हंगामे के बाद वेतन पुनः जारी किया गया, लेकिन इसके बाद उपेंद्र कुमार का स्थानांतरण हो गया। वर्तमान में प्रभारी डीआईओएस मनोज कुमार के कार्यकाल में मार्च माह का वेतन फिर रोक दिया गया, जिससे आक्रोशित होकर सौरभ तिवारी ने आत्मदाह का प्रयास किया।
वहीं, डीआईओएस मनोज कुमार ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि वेतन रोकने का निर्णय न्यायालय के आदेश के अनुपालन में लिया गया है, न कि किसी प्रकार की वसूली के लिए। फिलहाल, घटना के बाद कार्यालय में तनाव का माहौल है और मामले को लेकर जांच की मांग उठने लगी है।