Varanasi News: जिला प्रशासन और जल पुलिस द्वारा इन घाटों पर किसी भी प्रकार की चेतावनी का बोर्ड या वाटर बैरिकेडिंग नहीं की गई है। वहीं, नमो घाट का फर्श खत्म होते ही 80 फिट से अधिक की गहराई है। घाट के मल्लाहों की माने तो इन घाटों पर लोग गहराई में न जाने पाएं इसके लिए वाटर बैरिकेडिंग बेहत महत्वपूर्ण है।
वाराणसी के नमो घाट पर सोमवार की शाम गंगा में नहाने के दौरान सेल्फी लेने के चक्कर में सूरज कुमार (24) डूब गया। सूरज अपने दोस्तों के साथ नमो घाट पर घूमने आया था। इस दौरान सभी नहाने के लिए पानी में उतर गए। नहाने के दौरान सूरज और उसके दोस्त फोटो खींच रहे थे।
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घटना की जानकारी पाकर आदमपुर पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। एनडीआरएफ और निजी गोताखोरों की टीम ने करीब घंटे भर के प्रयास के बाद सूरज के शव को ढूंढ कर पानी से बाहर निकाला।
चोलापुर के छोटा गोसाईंपुर गांव निवासी सूरज के पिता बच्चे लाल समेत अन्य परिजन मौके पर पहुंचे। परिजनों ने बताया कि सूरज दोपहर में घर से निकला था। उसे तैरना नहीं आता था। बच्चे लाल के तीन बेटियों दो बेटों में सूरज सबसे छोटा था। इंस्पेक्टर आदमपुर वीरेंद्र सोनकर ने बताया कि युवक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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नमो घाट से पंचगंगा घाट तक गहराई बन रही मौत का कारण
काशी के घाटों में शुमार नमो घाट, प्रह्लाद घाट, गाय घाट, गोला घाट, ब्रह्मा घाट, नारद घाट और पंचगंगा घाट पर लोगों के डूबने की घटनाएं अन्य घाटों से अधिक है। इन घाटों पर सीढ़ियां और मढ़ी के तुरंत बाद 50 फिट से अधिक गहराई है। जिन्हें तैरना नहीं आता है, वह इन घाटों पर काल के गाल में समा जाते हैं।