ऐसा कम ही होता है कि किसी मंत्री को जिलाधिकारी को हटाने के लिए धरना-प्रदर्शन करने की नौबत आई हो। जिस तरह से योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने गाजीपुर डीएम के खिलाफ मोर्चा खोला है उस पर अब सवाल उठने लगे हैं। यह विवाद अब सीएम योगी तक पहुंच चुका है।
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सोमवार को मंत्री ओमप्रकाश सीएम से मिलकर डीएम के कथित कारनामों की सीडी सौपेंगे। डीएम को हटाने के लिए इस्तीफा देने तक की बात सामने आने के बाद यह मामला सुर्खियों में छाया हुआ है। लोग तरह तरह की बात करने लगे हैं।
आखिर डीएम से ऐसा क्या दुराव हो गया कि कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर को उन्हें हटाने के लिए धरना-प्रदर्शन और घेराव का निर्णय लेना पड़ा। चर्चा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि डीएम का तबादला कराकर कैबिनेट मंत्री जिले में दबदबा कायम करना चाहते हैं। उनके निशाने पर दो एसडीएम, एक बीडीओ और कुछ एसओ भी हैं। प्रदेश में भाजपा-भासपा गठबंधन की सरकार है।
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जिले से भासपा के दो विधायक ओमप्रकाश राजभर और त्रिवेणी राम हैं। केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा भी संसद में जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सिन्हा का पार्टी में क्या कद है, यह लोग जानते हैं। किसी अधिकारी को इधर से उधर कराना उनके लिए बड़ी बात नहीं है।
चर्चा है कि अगर भासपा कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न को लेकर कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर की जिलाधिकारी से कोई नाराजगी है तो वह सीएम के सामने बात रखकर आसानी से जिलाधिकारी का तबादला करा सकते हैं, लेकिन ऐसा क्या हो गया है कि उन्हें डीएम को हटाने के लिए धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लेना पड़ा।
एक समाचार पत्र में जिलाधिकारी को लेकर कैबिनेट मंत्री का बयान आने के बाद मंत्री और डीएम की लड़ाई रोचक हो गई है। लोगों में चर्चा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि डीएम का तबादला कराकर कैबिनेट मंत्री जिले में दबदबा कायम करना चाहते हैं
अपनों का काम न होने से नाराज हैं मंत्री
मंत्री ओमप्रकाश राजभर
- फोटो : demo pic
अपनों की उपेक्षा होने पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और भासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर डीएम संजय खत्री से खासे नाराज चल रहे हैं। यही वजह है कि कई बिंदुओं को मुद्दा बनाकर वह जिलाधिकारी को हटवाने पर अड़े हैं।
भासपा ने डीएम के खिलाफ मोर्चा खोलकर सहयोगी पार्टी भाजपा को सांसत में डाल दिया है। भाजपा नेताओं को जिलाधिकारी से कोई परहेज नहीं है। भाजपा सरकार भी उनके कामकाज से संतुष्ट नजर आती है।
यही वजह है कि प्रदेश में सरकार बनने के बाद कई जिलों के डीएम बदले गए लेकिन खत्री गाजीपुर डीएम की कुर्सी पर बने रहे लेकिन अब भासपा उन्हें हटवाने पर आमादा है। इसे वह मुद्दा बना चुके हैं। इसको लेकर चार जुलाई को कलेक्ट्रेट पर धरने का ऐलान कर चुके हैं।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर बता चुके हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री को भी इस बात से अवगत करा दिया है। उनका कहना है कि अब संजय कुमार खत्री डीएम रहेंगे अथवा मंत्री पद पर ओमप्रकाश राजभर रहेंगे।
राजनीतिक हलके में कहा जा रहा है कि भासपा के जिलाध्यक्ष के खिलाफ दलित उत्पीड़न का मुकदमा तो ओमप्रकाश राजभर के लिए महज एक बहाना है। हकीकत यह है कि वह इसके जरिये दूर का सियासी निशाना साध रहे हैं। उधर, डीएम को हटाने के मसले पर कैबिनेट मंत्री के अड़ियल रुख से भाजपा के नेता नाखुश नजर आ रहे हैं।
जिला महामंत्री श्यामराज तिवारी तो यहां तक कह चुके हैं कि अगर डीएम के खिलाफ प्रदर्शन करना है तो ओमप्रकाश राजभर पहले मंत्री पद छोड़ें। वजह जहूराबाद क्षेत्र के भाजपाजनों का अपना दर्द है। उस क्षेत्र के सरकारी मुलाजिम उनकी अनदेखी कर रहे हैं।
छोटे-छोटे मामलों में भासपा के लोग टांग अड़ा रहे हैं। गौर करने की बात यह कि भाजपा का प्रदेश नेतृत्व इस मुद्दे पर एकदम चुप है।
भाई पर कार्रवाई के बाद मंत्री ने खोला मोर्चा
कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर
- फोटो : अमर उजाला
कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के प्रतिनिधि और भासपा के जिलाध्यक्ष और उसके भाई द्वारा कुछ दिन पहले जमीन की पैमाइश करने गए चकबंदी कानूनगो के साथ मारपीट की घटना हुई थी।
इस मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर मंत्री प्रतिनिधि के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद कैबिनेट मंत्री औैर जिलाधिकारी के बीच तल्खी बढ़ गई है। डीएम के निर्देश पर हुई कार्रवाई से नाराज मंत्री ने मोर्चा खोल दिया है। जबकि सीएम के आदेश पर डीएम ने चकबंदी अधिकारियों की टीम बनाकर जमीन की पैमाइश कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।
एक माह पूर्व बरेसर थाना क्षेत्र के मनीरामपुर गांव निवासी नरीजन राजभर ने सीएम के जनता दरबार में पहुंचकर कैबिनेट मंत्री के प्रतिनिधि और भासपा जिलाध्यक्ष रामजी राजभर द्वारा वर्षों से कब्जा की गई जमीन को खाली कराने और न्याय दिलाने की गुहार लगाई थी। सीएम ने चकबंदी आयुक्त को पैमाइश कराकर मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया था।
चकबंदी आयुक्त ने डीएम संजय खत्री को पत्र के जरिये समस्या का जल्द समाधान करने निर्देश दिया था। इसके बाद डीएम ने चकबंदी अधिकारियों की टीम बनाकर पैमाइश करने तथा जमीन कब्जा मुक्त कराने का निर्देश दिया था।
आरोप है कि 17 जून को सहायक चकबंदी अधिकारी, कानूनगो और लेखपाल जब जमीन की पैमाइश करने पहुंचे तो भासपा के जिलाध्यक्ष और उसके भाई राजनेत राजभर ने कानूनगो के साथ मारपीट और गाली-गलौज करते हुए भगा दिया था।
सरकारी कर्मचारियों ने जब थाने में तहरीर दी तो पुलिस जांच कर कार्रवाई करने की बात कहकर टाल-मटोल करने लगी। इसके बाद मामला डीएम के संज्ञान में आया और उन्होंने निर्देश दिया, तब पुलिस सक्रिय हुई।
मामले के चार दिन बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। पार्टी के जिलाध्यक्ष पर मुकदमा दर्ज होने की जानकारी होते ही प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने डीएम के खिलाफ 12 दिन बाद मोर्चा खोल दिया।
भासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने आरोप लगाया है कि सरकार में भागीदार होने के बाद भी न तो बात सुनी जा रही है और न ही पार्टी के कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जा रहा है।
सरकार में रहकर 19 बिंदुओं पर जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक को अवगत कराते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी लेकिन किसी भी बिंदु पर कार्य नहीं हुआ। साथ ही दल के लोगों की उपेक्षा बढ़ती गई।
भासपा के राष्ट्रीय महासचिव और कैबिनेट मंत्री के बड़े पुत्र अरुण राजभर ने बताया कि विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रमेश यादव की ओर से जांच के नाम पर दल का झंडा फाड़ने के साथ कार्यकर्ताओं से दुर्व्यवहार किया गया था।
इसकी शिकायत सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री से कर उन्हें हटाने की मांग की गई थी। लेकिन उनको हटाया नहीं गया और निर्वाचन क्षेत्र की तहसील का एसडीएम बना दिया गया। ग्राम प्रधान, ब्लाक प्रमुख की शिकायतों को जिलाधिकारी की ओर से हमेशा नजरअंदाज किया जा रहा है।
मनरेगा के नाम पर क्षेत्र के बीडीओ कमीशन ले रहे हैं। जिलाधिकारी से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक की बीडीओ को हटाने और कई थानाध्यक्षों के कार्यक्षेत्र बदले जाने का भी अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया।
जिलाधिकारी ने दबाव बनाकर भासपा के जिलाध्यक्ष रामजी राजभर पर मुकदमा दर्ज करवा दिया। इसको लेकर पार्टी एवं कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। उन्होंने बताया कि ऐसे कई बिंदु हैं, जिसको लेकर जिलाधिकारी ने पार्टी कार्यकर्ताओं की बातों को नजरअंदाज किया है।