बंद रहे मंदिरों के कपाट, निभाई गई परंपरा
मंदिरों का शहर बनारस भी कोरोना काल में पूरी तरह थम गया। मंदिरों के कपाट आम भक्तों के लिए बंद हो गए। हालांकि राग, भोग और आरती की परंपरा का निर्वहन होता रहा। सावन से पहले सबसे पहले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। सावन में हर साल के मुकाबले श्रद्धालुओं की संख्या तो नाममात्र की रही, लेकिन लंबे समय बाद स्थानीय श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ का सावन में दर्शन किया।
इसके बाद धीरे-धीरे मंदिरों के खुलने का सिलसिला शुरू हो गया। काशी के कोतवाल कालभैरव का मंदिर भी लंबे समय तक बंद रहा। गंगा आरती की परंपरा भी एक अर्चक द्वारा निभाई गई। संपूर्ण गंगा आरती नौ महीने के बाद देव दीपावली के पहले से ही आरंभ हो सकी।
ऑनलाइन हुई पूजा, दर्शन और अभिषेक
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में देश और दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन दर्शन, अभिषेक और पूजन की नई व्यवस्था शुरू हुई। देश और दुनिया भर के श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ का ऑनलाइन दर्शन किया और रुद्राभिषेक भी कराया।
रंगभरी एकादशी पर रोकी गई बाबा की पालकी
रंगभरी एकादशी का आयोजन भी महंत परिवार की आपसी रार का साक्षी बना। आपसी खींचतान के कारण मंदिर प्रशासन ने बाबा की प्रतिमा और डोली को मंदिर में ही रोक दिया। हंगामें के बाद में उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।
पहली बार काशी में सड़क पर हुई सप्तर्षि आरती
काशी विश्वनाथ मंदिर में महंत परिवार को सप्तर्षि आरती करने से रोका गया। इसके बाद अर्चकों ने विरोधस्वरूप सड़क पर ही सप्तर्षि आरती संपन्न की। संघ के पदाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद महंत परिवार को फिर से सप्तर्षि आरती का अधिकार मिला।
पहली बार गोरक्षपीठ में हुई बाबा की सप्तर्षि आरती
काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में पहली बार गोरक्षपीठ में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सप्तर्षि आरती का आयोजन किया।
काशी को मिला मणि मंदिर
करपात्री महाराज की तपोस्थली धर्मसंघ परिसर में मणि मंदिर का सपना साकार हुआ। 28 फरवरी को देवालय संकुल में प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद मंदिर श्रद्धालुओं को समर्पित कर दिया गया। प्रभु श्रीराम दरबार की झांकी सहेजे यह मंदिर आठ दशक पहले 1940 में स्थापित किया गया था।
वाराणसी की देव दीपावली।
- फोटो : अमर उजाला
अन्नकूट महोत्सव पर सजी झांकी
मां अन्नपूर्णा के दरबार में अन्नकूट महोत्सव पर झांकी सजाई गई। धनतेरस पर श्रद्धालुओं ने कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार माता के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन किए।
राममंदिर शिलान्यास में शामिल हुए काशी के विद्वान
भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण के लिए आयोजित शिलान्यास समारोह में काशी से गंगाजल, बेलपत्र समेत कई रत्न भेजे गए। वहीं काशी विद्वत परिषद के विद्वानों ने इस आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दुनिया ने देखी काशी की देव दीपावली
कोरोना संक्रमण के बावजूद काशी की उत्सवधर्मिता को पूरी दुनिया ने देखा। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस आयोजन में शामिल होकर इसमें चार चांद लगा दिए। काशी के अर्ध चंद्राकार घाटों पर सजे दीयों की जगमगम को 19 देशों में लाइव प्रसारित किया गया।
ईद और बकरीद पर रही कोरोना की काली छाया
ईद और बकरीद पर कोरोना संक्रमण की काली छाया का असर देखने को मिला। ईद और बकरीद पर न तो सामूहिक आयोजन हुए ना ही मेला सजाया गया। वहीं ताजिय, अलम और दुलदुल की प्राचीन परंपरा भी प्रतीकात्मक स्वरूप में निभाई गई।
जैन, सिख और इसाई धर्म में निभाई गई परंपरा
कोरोना संक्रमण काल के दौरान जैन समुदाय, सिख और इसाई समुदाय के आयोजन सिमटकर रह गए। परंपरा निभाते हुए जैन मंदिर, गुरु द्वारा और चर्च में सीमित लोगों के बीच सभी आयोजन संपन्न हुए।