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सावन 2026: जलाभिषेक के लिए यादव बंधुओं ने की ललिता घाट से जल भरने की मांग, चंद्रवंशी गोप सेवा समिति ने की बैठक

Mon, 06 Jul 2026 04:05 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: यादव बंधुओं का कहना है कि अब तक ललिता घाट से ही जल भरने की परंपरा थी लेकिन पिछले दो साल से विकास कार्य के चलते प्रशासन ने इस पर रोक लगा रखी है। 
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चंद्रवंशी गोप सेवा समिति ने की बैठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सावन के पहले सोमवार को यादव बंधु श्रीकाशी विश्वनाथ का जलाभिषेक करेंगे। उन्होंने रविवार को बैठकर कर जलाभिषेक के दौरान होने वाली समस्याओं पर चर्चा की और प्रशासन से इस परंपरा को कायम रखने के लिए मुकम्मल व्यवस्थाएं करने की मांग की। उन्होंने इस बार महामृत्युंजय महादेव में जलाभिषेक के लिए ललिता घाट से जल भरने के लिए जिला प्रशासन से मांग की।

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यादव बंधुओं का कहना है कि अब तक ललिता घाट से ही जल भरने की परंपरा थी लेकिन पिछले दो साल से विकास कार्य के चलते प्रशासन ने इस पर रोक लगा रखी है। वे श्रीकाशी विश्वनाथ सहित नौ शिवालयों व देवालयों में जलाभिषेक करेंगे। चंद्रवंशी गोप सेवा समिति की अहिल्याबाई घाट स्थित समिति के अनिल यादव के प्रतिष्ठान में हुई बैठक में पदाधिकारियों व सदस्यों ने विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि ललिता घाट पर विकास कार्य पूरा हो गया है। इसलिए इस बार जल वहीं से भर कर महामृत्युंजय महादेव जाने की अनुमति दी जाए। उन्होंने जलाभिषेक के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, खराब सड़कों को ठीक कराने, साफ-सफाई, बिजली के जर्जर तारों को बदलने आदि की मांग की।

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समिति के अध्यक्ष लालजी चंद्रवंशी ने बताया कि जलाभिषेक यात्रा केदारघाट पर गौरी केदारेश्वर महादेव, तिलभांडेश्वर, शीतला माता, अहिलेश्वर महादेव, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर, महामृत्युंजय, त्रिलोचन महादेव, ओंकालेश्वर महादेव के बाद लाटभैरव में जलाभिषेक व दर्शन कर यात्रा को विराम दिया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता पारसनाथ यादव ने की। संचालन श्यामू यादव व धन्यवाद ज्ञापन अनिल यादव ने किया। बैठक में लालजी चंद्रवंशी, शालिनी यादव, अजय यादव, मनोज यादव, अशोक यादव, प्रभाकर यादव (नगर अध्यक्ष), विकास यादव आदि मौजूद रहे।

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94 साल से चली आ रही है जलाभिषेक की परंपरा
लालजी चंद्रवंशी ने बताया कि यह ऐतिहासिक परंपरा वर्ष 1932 से लगातार चली आ रही है। इस वर्ष जलाभिषेक का 94वां वर्ष है। इस परंपरा में कोई बदलाव नहीं होगा। भोला सरदार और चुन्नी सरदार ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। काशी के यादव बंधु आज भी उनके संकल्प को भव्यतापूर्वक निभा रहे हैं। बैठक में भोला सरदार और चुन्नी सरदार की स्मृति में शहर में एक द्वार बनवाने की मांग की गई।
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