समिति के अध्यक्ष लालजी चंद्रवंशी ने बताया कि जलाभिषेक यात्रा केदारघाट पर गौरी केदारेश्वर महादेव, तिलभांडेश्वर, शीतला माता, अहिलेश्वर महादेव, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर, महामृत्युंजय, त्रिलोचन महादेव, ओंकालेश्वर महादेव के बाद लाटभैरव में जलाभिषेक व दर्शन कर यात्रा को विराम दिया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता पारसनाथ यादव ने की। संचालन श्यामू यादव व धन्यवाद ज्ञापन अनिल यादव ने किया। बैठक में लालजी चंद्रवंशी, शालिनी यादव, अजय यादव, मनोज यादव, अशोक यादव, प्रभाकर यादव (नगर अध्यक्ष), विकास यादव आदि मौजूद रहे।
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94 साल से चली आ रही है जलाभिषेक की परंपरा
लालजी चंद्रवंशी ने बताया कि यह ऐतिहासिक परंपरा वर्ष 1932 से लगातार चली आ रही है। इस वर्ष जलाभिषेक का 94वां वर्ष है। इस परंपरा में कोई बदलाव नहीं होगा। भोला सरदार और चुन्नी सरदार ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। काशी के यादव बंधु आज भी उनके संकल्प को भव्यतापूर्वक निभा रहे हैं। बैठक में भोला सरदार और चुन्नी सरदार की स्मृति में शहर में एक द्वार बनवाने की मांग की गई।