लालजी यादव ने बताया कि जलाभिषेक की परंपरा 1932 में अकाल के बाद शुरू हुई थी। देश में अकाल के कारण पशु-पक्षी भी जल के बिना मर रहे थे। तब बनारस के यादव समाज के भोला सरदार और चुन्नी सरदार ने बाबा भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक किया। जलाभिषेक के बाद ही जोरदार बारिश शुरू हो गई थी। तभी से जलाभिषेक की आस्था बढ़ती गई। वर्तमान में जलाभिषेक का नेतृत्व भोला सरदार के बेटे लालजी यादव कर रहे हैं।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने शुक्रवार को काशी विश्वनाथ मंदिर और धाम का निरीक्षण कर सावन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं के साथ ही व्यवस्था पर ध्यान दिया जाए। मंदिर परिसर में भीड़भाड़ एकत्र नहीं होने दें और श्रद्धालुओें को दर्शन के साथ आगे बढ़ाते रहें। उन्होंने निर्देंश दिया कि सुगम दर्शन और आरती में शामिल होने वालों की समयसीमा तय करें ताकि ज्यादा भीड़ की समस्या नहीं रहे।