फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वाराणसी में ये कैसी व्यवस्था: कागज पर शहर में पांच सीएचसी, एक पर ही मिल रही एक्स-रे की सुविधा

Sat, 06 Jan 2024 06:26 PM IST
प्रगति चंद रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी।

सार

वाराणसी जिले में स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों को जरूरी जांच के लिए भटकना पड़ रहा है। शहरी सीएचसी में पांच में से सिर्फ एक पर ही एक्स-रे की सुविधा मिल रही है।  
विज्ञापन
सीएचसी काशी विद्यापीठ में बंद ताला। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

स्वास्थ्य विभाग की ओर से साल दर साल अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर भले ही सुविधाएं बढ़ाने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल परे हैं। अमर उजाला की पड़ताल में यह सामने आया है कि कागज पर तो पीएचसी को अपग्रेड कर सीएचसी कर दिया गया है, लेकिन मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

विज्ञापन


पांच शहरी सीएचसी में महज शिवपुर में एक्स-रे की सुविधा है। 9 ग्रामीण इलाकों में चलने वाली सीएचसी में तीन जगह पर अल्ट्रासाउंड की मशीनें लगी हैं, लेकिन टेक्नीशियन की कमी की वजह से लोगों को लाभ नहीं मिल पाता है। अस्पतालों में पूरे बेड नहीं हैं, वहीं अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और खून की कई जांच भी नहीं होती है। इसके लिए मरीजों को जिला, मंडलीय अस्पताल तक का चक्कर लगाना पड़ता है। जिले में इस समय शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर 57 पीएचसी, सीएचसी हैं।

शहरी सीएचसी काशी विद्यापीठ: महिला वार्ड में लटक रहा ताला, नहीं होती जांच
काशी विद्यापीठ पीएचसी को अपग्रेड कर करीब साल भर पहले शहरी सीएचसी का दर्जा दिया गया था, लेकिन स्थिति जस की तस है। यहां नेत्र रोग विभाग है, लेकिन इस समय कोई नेत्ररोग विशेषज्ञ नहीं है। गुरुवार को यहां महिला वार्ड में ताला लटका मिला। स्वास्थ्य केंद्र पर 30 बेड होने चाहिएं, लेकिन मौके पर महज 14 बेड ही हैं। एक्स-रे के लिए जांच कक्ष भी नहीं बना है। डॉक्टर अगर अल्ट्रासाउंड या एक्स-रे लिखते हैं तो महिलाओं को जिला महिला अस्पताल जाना पड़ता है। पैथालॉजी के बाहर खून की 64 तरह की जांच की जानकारी की सूची है, लेकिन बृहस्पतिवार की दोपहर में यहां महिलाएं डॉक्टर को दिखाने पहुंची तो उन्हें महिला अस्पताल में जांच कराने की सलाह दी गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

शहरी सीएचसी सारनाथ: एक्सरे कक्ष है, मशीन नहीं, विशेषज्ञों का भी संकट

शहरी सीएचसी सारनाथ मार्च 2023 चल रही है, लेकिन किसी तरह ओपीडी, खून की जांच शुरू हो पाई है। यहां एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के लिए कक्ष तो बनवाया गया है, लेकिन मशीन हीं नहीं लगवाई जा सकी है। जांच कब से शुरू हो सकेगी, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में मरीजों को दूसरे सरकारी अस्पताल तक भागदौड़ करनी मजबूरी है।

केस-1
घुरहूपुर निवासी मरीज के परिजन राकेश ने अपनी पत्नी को सारनाथ सीएचसी में ऑपरेशन के लिए भर्ती करवाया। उन्होंने बताया कि किसी तरह आपरेशन तो हो गया, लेकिन अल्ट्रासाउंड और एक्सरे जांच बाहर करानी पड़ी। कुछ दवाइयां भी बाहर से लानी पड़ी।

केस-2
लोहता के रहीमपुर निवासी मुन्ना के पैर में कुछ दिनों से दर्द था। दो दिन पहले काशी विद्यापीठ सीएचसी पर गए तो डॉक्टर ने एक्सरे कराने की सलाह दी। मुन्ना के मुताबिक सीएचसी पर एक्सरे की सुविधा नहीं थी, लिहाजा बाहर से जांच करवाया।

एक नजर में आंकड़ा

ग्रामीण इलाका
  • सीएचसी- 9
  • पीएचसी- 24

शहरी इलाका
  • सीएचसी-5
  • पीएचसी-24

शहर में चलने वाली सीएचसी
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौकाघाट
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुर
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुर्गाकुंड
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काशी विद्यापीठ
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सारनाथ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें