दो से तीन गुना बढ़ जाता है हवा का दबाव
प्रोफेसर सौरभ सिंह का कहना है कि हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी कक्ष में हवा का दबाव सामान्य वायु दबाव से 2 से 3 गुना अधिक बढ़ जाता है। इन परिस्थितियों में फेफड़े सामान्य वायु दबाव में शुद्ध ऑक्सीजन लेने की तुलना में कहीं अधिक ऑक्सीजन लेते हैं। थेरेपी का उपयोग कई तरह के इलाज में होता है।
इसमें ठीक न होने वाले घाव भी शामिल हैं। इसमें मधुमेह संबंधी पैर का अल्सर, गंभीर एनीमिया, मस्तिष्क में फोड़ा, जलन, कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता, कुचलने वाली चोट, अचानक बहरापन, डिकंप्रेशन बीमारी, गैंग्रीन, त्वचा या हड्डी का संक्रमण जो ऊतक मृत्यु का कारण बन सकते हैं। यह थेरेपी जीवन और अंग बचाने के उपाय के रूप में और जरूरतमंद रोगियों के लिए गेमचेंजर मशीन के रूप में काम करती है।