डॉ. एसएस पांडेय
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जोड़ों के दर्द और सूजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समस्या होने पर खुद से दर्द की दवा लेने के बजाय फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करना चाहिए। यह बातें बीएचयू के अस्थि रोग विभाग के फिजियो प्रो. एसएस पांडेय ने विश्व फिजियोथेरेपिस्ट दिवस के उपलक्ष्य पर बातचीत के दौरान कही। हर साल 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि खेलों में फिजियोथेरेपी का महत्व बढ़ गया है। इसकी मदद लेने पर खिलाड़ी के प्रदर्शन में 20-25 प्रतिशत तक का सुधार हो जाता है। फिजियोथेरेपी सिर्फ फ्रैक्चर या हड्डी के टूटने के बाद ही काम नहीं करता बल्कि यह खिलाड़ी के प्रदर्शन को बेहतर बनाता है। सात हजार खिलाड़ियों पर किए शोध से पता चला है कि जानकारी के अभाव और फिजियो की मदद नहीं लेने की वजह से 40 प्रतिशत खिलाड़ी असमय खेलों से दूर हो जा रहे हैं।
एंकल, घुटने, कंधे और एल्बो की चोट 16 से 20 साल के खिलाड़ी असमय खेलों से बाहर कर दिए जाते हैं। फुटबॉल, कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स और बास्केटबॉल के खिलाड़ी इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्पोर्ट्स इंजरी खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी समस्या है। अगर सही समय पर फिजियो की मदद ली जाए तो समस्या का न सिर्फ समाधान होता है बल्कि उसे ठीक कर प्रदर्शन को बेहतर किया जा सकता है।