नेक काम के लिए इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। रोली रघुवंशी समाज में एक मिसाल पेश कर रही हैं। घर की जिम्मेदारियों को पूरा करने के साथ ही वह साक्षरता की अलख जगा रही हैं। हर शाम रविदास घाट का नजारा कुछ और ही होता है। घाट की सीढ़ियों पर गरीब, शोषित, वंचित लोगों के बच्चों को शिक्षित किया जाता है।
रोली पिछले दो साल से अपनी संस्था की मदद से बच्चों को निशुल्क शिक्षा देती हैं। वर्तमान में 60 से ज्यादा बच्चे घाटों पर भविष्य संवारने में जुटे हुए हैं। रोली बताती हैं कि शुरुआत में तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि समय बदलता गया और लोग जुड़ते गए।
घाट पर सजने वाली इस कक्षा में प्रतिदिन एलकेजी से लेकर 10वीं तक के बच्चों को शिक्षित किया जाता है। बच्चों को पढ़ाई के साथ कराते व अन्य खेलों की भी ट्रेनिंग दी जाती है। रोली के प्रयासों से प्रभावित होकर तत्कालीन अपर पुलिस आयुक्त सुभाष दुबे ने भी काफी मदद की थी।