विश्व पटल पर आकर्षण का केंद्र बन चुकी वाराणसी के रामनगर की विख्यात रामलीला का आज श्रीगणेश होगा। इस लीला को देखने के लिए देश-विदेश के लोग रामनगर पहुंच चुके हैं। रामबाग में रावण जन्म की लीला के लिए देवलोक सोमवार की शाम बन कर तैयार हो गया।
इसी देवलोक में देवी-देवता निवास करेंगे। दूसरी ओर रावण जन्म लेने के साथ ही यज्ञ कर अजर-अमर होने का वरदान हासिल कर अत्याचार आरंभ करेगा। विश्व पटल पर आकर्षण का केंद्र बन चुकी रामनगर की विख्यात रामलीला के लिए शाही सवारी का ट्रायल लिया गया। वर्ष भर बाद किले से बग्गी निकली।
मंगलवार को अनंत चतुर्दशी की शाम काशिराज डॉ. अनंत नारायण सिंह बग्घी पर सवार होकर रामबाग पहुंचेंगे। इस शाही सवारी के आगे बनारस स्टेट के निशान के साथ डंका बजेगा। हाथी, घोड़े के साथ लाव-लश्कर देर शाम सज गया। रावण जन्म के साथ रामलीला आरंभ होगी।
रामनगर की रामलीला के लिए लाव -लश्कर सोमवार की शाम सज गया। देर शाम बनारस स्टेट के निशान, डंका के साथ शाही सवारी निकलने के लिए रिहर्सल किया गया। अस्तबल में 36वीं वाहिनी पीएसी घोड़ों के लिए अलग शेड डाल दिया गया।
पंचवटी में तीन हाथियों का बेड़ा सजाया गया। चुन्नू जोड़ी वाले ने छह घोड़ों को अस्तबल से निकाल कर ट्रायल लिया। मंगलवार की शाम पांच बजे किले के मुख्य द्वार पर डंका बजेगा और राजा की शाही सवारी लीला स्थल के लिए निकल जाएगी।
इस लीला को देखने के लिए वृंदावन, अयोध्या, हरिद्वार, चित्रकूट, सीतामढ़ी से लेकर देश के अन्य हिस्सों से संतों की टोलियां रामनगर पहुंच गई हैं। धर्मशालाओं के अलावा मोहताज खाने में साधु-संतों के ठहरने की व्यवस्था की गई है।
तरह-तरह के वेश में लीला प्रेमी रामनगर की सड़कों पर नजर आने लगे हैं। गंजी, गमछा, अंगौछा के अलावा धोती-कुरता में छड़ी लिए लीला प्रेमियों के समूह अनंत चतुर्दशी से रामनगर में छा जाएंगे।