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World Cancer Day 2025: कैंसर के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, इन चार बातों का जरूर रखें ध्यान

Tue, 04 Feb 2025 10:40 AM IST
प्रगति चंद रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी।

सार

World Cancer Day 2025: वाराणसी शहर के अस्पतालों में रोज कैंसर के 250 नए मरीज आ रहे हैं। केवल बीएचयू और कैंसर संस्थान में ही 150 नए मरीज रोज आ रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों द्वारा मरीजों को सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। 
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विश्व कैंसर दिवस 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कैंसर का ग्राफ हर दिन बढ़ता जा रहा है। बीएचयू अस्पताल और महामना कैंसर संस्थान की ओपीडी में रोज करीब 150 नए लोगों में कैंसर पुष्टि हो रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्रों और निजी अस्पतालों में भी करीब 100 कैंसर पीड़ित मिल रहे हैं। कुछ में प्रारंभिक लक्षण तो कुछ में बीमारी दूसरे, तीसरे चरण में मिल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर तो पुरुषों में मुंह के कैंसर की समस्या अधिक देखने को मिल रही है।

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कैंसर के प्रति जागरूकता को लेकर हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। इस साल की थीम यूनाइटेड बाय यूनिक है। आईएमएस बीएचयू में ही सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, रेडियोथेरेपी, स्त्री रोग विभाग, सर्जरी, हिमेटोलॉजी, बाल रोग विभाग, गैस्ट्रोलॉजी विभाग में अलग-अलग कैंसर के लक्षण वाले लोग आते हैं। जहां पुष्टि होने के बाद इलाज शुरू होता है। इसमें महिलाओं में सर्वाइकल (बच्चेदानी) कैंसर प्रमुख है। इसके अलावा बच्चों, बड़ों में ब्लड कैंसर, लिवर कैंसर आदि के मरीज भी इलाज करवाने रहे हैं।

बीएचयू में हर साल 25000 से अधिक मरीज

बीएचयू के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रो. मनोज पांडेय का कहना है कि दो साल पहले तक यहां साल में 20 हजार कैंसर पीड़ित आते थे। अब यह आंकड़ा बढ़कर 25 हजार के पार पहुंच गया है। इस समय केवल बीएचयू में ही सभी विभागों को मिलाकर 25 से 30 हजार मरीज आ रहे हैं। महामना कैंसर संस्थान में भी वाराणसी के साथ ही पूर्वांचल के अन्य जिलों से मरीज पहुंच रहे हैं।

जांच के बाद होती है कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रो. मनोज पांडेय का कहना है कि ओपीडी में सभी मरीजों का रिकॉर्ड अपडेट करवाया जाता है, ताकि फाॅलोअप करने में कोई परेशानी न हो। विभाग में हर दिन करीब 300 से अधिक मरीजों की ओपीडी में करीब 15 महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, 10 में सर्वाइकल कैंसर, 15 पुरुषों में अलग-अलग कारणों से मुंह का कैंसर देखने को मिलता है। इनकी सर्जरी करने के साथ ही कीमोथेरेपी करवाई जाती है। 

रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. सुनील चौधरी का कहना है कि ओपीडी में औसतन 10 से अधिक महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की समस्या लेकर आती हैं, इनकी उम्र 45 से 55 साल के बीच रहती है। पहले यह बीमारी 50 के बाद के उम्र में होती थी, अब 40 के बाद ही देखने को मिल रही है।

दांत, मसूड़ों में हैं सूजन को न करें नजरअंदाज

बीएचयू दंत चिकित्सा संकाय के पूर्व प्रमुख प्रो. टीपी चतुर्वेदी का कहना है कि पान, गुटखा, तंबाकू का सेवन करने वालों को मुंह का कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है। दांतों, मसूड़ों में सूजन भी आगे चलकर खतरा पैदा करते हैं। अगर मुंह में किसी तरह का छाला हो या सफेद दाग जैसा भी कुछ दिखे तो इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तीन सप्ताह तक ऐसा रहने पर तुरंत दंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए। हर दिन की ओपीडी में 15 ऐसे मरीजों में कैंसर के लक्षण दिखने के बाद उनका आगे का इलाज शुरू किया जाता है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम करती है स्क्रीनिंग

सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी का कहना है कि कैंसर को लेकर विभाग की ओर से अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से शहर और ग्रामीण इलाकों मरीजों की स्क्रीनिंग की जाती है। जिन लोगों में कैंसर के लक्षण दिखाई देते हैं तो महामना कैंसर संस्थान से संपर्क कर आगे का इलाज करवाने की सलाह भी दी जाती है। यह एक ऐसी बीमारी है जिससे बचाव के उपायों का पालन कर इससे बचा जा सकता है।
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इन बातों का ध्यान देना जरूरी

  1. ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए 40 साल की उम्र के बाद साल में एक बार मेमोग्राफी करवानी चाहिए।
  2. दांतों और मसूड़ों की समस्या न हो, इसलिए हर छह माह में दंत चिकित्सक से मिलते रहना चाहिए।
  3. सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह पर जरूरी टीका भी समय से लगाना चाहिए।
  4. अगर किसी तरह का चोट लंबे समय से ठीक न हो रहा हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
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