गंगा में वाराणसी से हल्दिया तक लगभग 1360 किलोमीटर लंबे जलमार्ग को जल परिवहन के रूप में विकसित करने की योजना को पंख लगने लगे हैं। इसके लिए वर्ल्ड बैंक ने 375 मिलियन डॉलर का लोन स्वीकृत कर दिया है।
शुक्रवार को दिल्ली में हुई बैठक में भारत सरकार और वर्ल्ड बैंक के बीच समझौता हुआ। जून से यह फंड मिलना शुरू हो जाएगा। इनलैंड वाटरवेज अथारिटी ऑफ इंडिया की ओर से गंगा में वाराणसी से हल्दिया के समुद्र तट तक जलमार्ग विकास परियोजना को विकसित किया जा रहा है।
ऐसे में बड़े-बड़े जलपोत गंगा में तैरते नजर आएंगे। इस योजना की लागत लगभग 800 मिलियन डॉलर (लगभग 5369 करोड़) है। इसमें से 375 मिलियन डॉलर वर्ल्ड बैंक लोन देगा और 380 मिलियन डॉलर भारत सरकार खर्च करेगी।
वहीं बाकी पैसा पीपीपी मॉडल के तहत आएगा। वर्ल्ड बैंक तभी लोन देता है जब प्रोजेक्ट को कैबिनेट की मंजूरी मिल जाए और लगभग 30-40 प्रतिशत कार्य हो जाए।
राष्ट्रीय जलमार्ग 1 पर जल परिवहन विकास योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद शुक्रवार को समझौते पर वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामला विभाग के संयुक्त सचिव समीर कुमार खरे, उपाध्यक्ष और योजना निदेशक आईडब्ल्यूएआई प्रवीर पांडेय तथा वर्ल्ड बैंक इंडिया के कंट्री डायरेक्टर जुनैद अहमद ने हस्ताक्षर किए।
समझौते के साथ ही अब फंड मिलने का रास्ता साफ हो गया है। जून से फंड मिलना शुरू हो जाएगा। बता दें कि पहले प्रोजेक्ट के लिए जरूरी 800 मिलियन डॉलर वर्ल्ड बैंक देने वाला था पर बाद में भारत सरकार ने लोन का प्रतिशत घटाकर 380 मिलियन डॉलर और बाकी के पीपीपी मॉडल से जुटाने की योजना बनाई।