ये आदतें बढ़ा सकती हैं अल्जाइमर का खतरा
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गंगा के निकटवर्ती इलाकों में रहने वालों में भी खतरा
प्रो. विजयनाथ मिश्र के अनुसार शोध के दूसरे भाग में गंगा के निकट के 25 किलोमीटर दायरे में रहने वालों को भी शामिल किया गया। इसमें यह देखा गया कि इस इलाके के लोगों में भी अल्जाइमर की बीमारी अधिक देखने को मिल रही है। इसकी वजह से यहां के पानी में मिलने वाले अलग-अलग धातुओं में प्रदूषण की मात्रा अधिक मिली, जिसका असर व्यक्ति के दिमाग पर पड़ रहा है। यहीं अल्जाइमर का कारण भी है। शोध में यह भी देखा गया कि पहले के समय में लोग जब कुएं का पानी पीते थे तो वह ज्यादा शुद्ध रहता था, गंगा किनारे रहने वालों को शुद्ध पानी भी नही मिल पा रहा है। प्रो. मिश्र के अनुसार अगर पौष्टिक आहार, ताजा सब्जी, फल, शुद्ध जल का सेवन किया जाए तो इस बीमारी से बहुत हद तक राहत मिल सकती है।
दो हजार मरीजों की स्क्रीनिंग, 200 में मिले लक्षण
प्रो. विजयनाथ मिश्र के निर्देशन में शोध करने वाली डॉ. विनीता ने बताया कि शोध के दौरान न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में आने वाले दो हजार मरीजों की जानकारी जुटाई गई। इन लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें 200 लोगों में भूलने की बीमारी जैसे लक्षण देखने को मिले। इनकी उम्र 45 से 65 के बीच रही। मरीजों की सहमति के आधार पर 70 लोगों को शोध में शामिल किया गया। इसमें करीब 35 मरीज जो कि सामान्य थे जबकि 35 मरीज भूलने की बीमारी वाले शामिल किए गए। इसमें सामान्य बीमारी वालों की तुलना में जिन लोगों में अल्जाइमर जैसे लक्षण थे, उनके व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिली। साथ ही शरीर में विटामिन की मात्रा भी कम होती जा रही थी। यानी कि ये लोग अल्जाइमर से ग्रसित हो चुके थे। ऐसे लोगों को आगे का इलाज करने के लिए इनको इस बीमारी से बचाव के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।