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लोलार्क कुंड स्नान आज: यहां सूर्य भगवान की होती है पूजा लेकिन फल देते हैं महादेव, ये है मान्यता

Thu, 21 Sep 2023 12:00 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

गुरुवार ब्रह्ममुहूर्त से ही लोलार्क कुंड पर स्नान चल रहा है। बुधवार को 11 बजे के बाद षष्ठी तिथि आरंभ होते ही श्रद्धालुओं ने लोलार्क कुंड में स्नान शुरू कर दिया। भगवान आदित्य की कृपा के लिए श्रद्धालुओं ने कुंड में डुबकी लगाई और संतति की कामना की। बुधवार देर शाम तक 20 हजार से अधिक लोगों ने लोलार्क कुंड में स्नान किया।
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लोलार्क कुंड पर स्नान - फोटो : अमर उजाला
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संतति और आरोग्य की कामना से श्रद्धालु लोलार्क षष्ठी पर वाराणसी के लोलार्क कुंड में डुबकी लगा रहे हैं। इस बार चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं के कुंड में डुबकी लगाने का अनुमान है। कुंड में स्नान के लिए बुधवार दोपहर से ही पूर्वांचल समेत देश भर के राज्यों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था।

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गुरुवार ब्रह्ममुहूर्त से ही लोलार्क कुंड पर स्नान चल रहा है। बुधवार को 11 बजे के बाद षष्ठी तिथि आरंभ होते ही श्रद्धालुओं ने लोलार्क कुंड में स्नान शुरू कर दिया। भगवान आदित्य की कृपा के लिए श्रद्धालुओं ने कुंड में डुबकी लगाई और संतति की कामना की। बुधवार देर शाम तक 20 हजार से अधिक लोगों ने लोलार्क कुंड में स्नान किया।



वहीं, दूसरी तरफ उदया तिथि के स्नान के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचने का सिलसिला भी जारी था। कुंड से लेकर गली और सड़क तक श्रद्धालु स्नान के लिए कतारबद्ध हो गए थे। शाम होते-होते एक कतार सोनारपुरा से आगे तो दूसरी कतार गंगा घाट की तरफ बढ़ चली थी। घाटों पर ही श्रद्धालुओं ने चूल्हा जलाकर भोजन की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं। स्थानीय लोगों ने भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अपने-अपने घरों के दरवाजे खोल दिए थे। किसी ने पानी का इंतजाम किया तो किसी ने चाय का। श्रद्धालुओं की कतार के कारण अस्सी और भदैनी की गलियों में जाम जैसी स्थिति हो गई।

 

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लोलार्क कुंड में स्नान - फोटो : अमर उजाला

पूरबमुखी अर्घे वाला इकलौता शिवलिंग है लोलार्केश्वर महादेव

लोलार्केश्वर महादेव मंदिर के महंत रमेश पांडेय ने बताया कि लोलार्क कुंड में स्नान के बाद लोलार्केश्वर महादेव की पूजा का विधान है। यह विश्व का इकलौता शिवलिंग है जिसका अर्घा पूरब मुखी है। मान्यता है कि भगवान सूर्य ने तपस्या के बाद स्वयं इस शिवलिंग को यहां स्थापित किया था। यहां की गई पूजा सूर्य भगवान को पहुंचती है लेकिन उसका फल उन्हें महादेव देते हैं।

पुजारी के मुताबिक लोलार्क षष्ठी के दिन लोलार्क कुंड में स्नान करने से संतान की प्राप्ति का फल प्राप्त होता है। साथ ही चर्म रोगों का भी निवारण होता है। मान्यता है कि सूर्य भगवान का मन काशी के दर्शन से अत्यंत लोल (विस्मृत) हो गया था। इस कारण ही वहां पर सूर्य का नाम लोलार्क पड़ गया। काशी के दक्षिण दिशा में असि-संगम के समीप ही लोलार्क विराजमान हैं। अगहन मास के किसी रविवार को सप्तमी या षष्ठी तिथि को लोलार्क की यात्रा करके मनुष्य समस्त पापों से मुक्ति पा जाता है। सूर्यग्रहण के समय स्नान और दान से कुरुक्षेत्र का दस गुना फल प्राप्त होता है। माघ मास की शुक्ल सप्तमी के दिन स्नान से मनुष्य अपने सात जन्म के संचित पापों से तुरंत मुक्त हो जाता है। जो भी पवित्र व्रत धारण कर हर रविवार लोलार्क के दर्शन करतना है, उसे इस लोक में कोई दुख नहीं भोगना पड़ता। हर रविवार लोलार्क के दर्शन कर उनका पादोदक सेवन करने वाले को दाद-खुजली इत्यादि रोग भी नहीं होता।
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