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बनारस में आज टूटेगा इतिहास, इस अखाड़े में पहली बार महिला पहलवान दिखाएंगी दम

Tue, 28 Nov 2017 10:28 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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अस्सी घाट पर आज से आयोजित होगी कुश्ती चैंपियनशिप - फोटो : अमर उजाला
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 प्रयोगधर्मी अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास पर आयोजित कुश्ती चैंपियनशिप में पहली बार महिला पहलवान अपना दमखम दिखाएंगी। संकटमोचन मंदिर के पूर्व महंत स्व. अमरनाथ मिश्रा की स्मृति में आयोजित बनारस केसरी और बनारस कुमार कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन 28 नवंबर से 30 नवंबर तक किया जाएगा। 
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जिला कुश्ती संघ के गोरखनाथ यादव ने बताया कि सोमवार को अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास पर 370 पहलवानों ने अपना वजन कराया। 10 सालों में पहली बार इतनी संख्या में पहलवान किसी प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं। वजन के दौरान महिला वर्ग में 36, बनारस केसरी में 40 और बनारस कुमार में 35 पहलवान शामिल हैं।

महिला वर्ग में अंतरराष्ट्रीय पहलवान पूजा, राष्ट्रीय पहलवान भावना, नंदिनी सरकार और आस्था शामिल हो रही हैं। अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास और संकट मोचन मंदिर के महंत विश्वंभरनाथ मिश्रा के निर्देश पर पिछले 27 वर्षों के इतिहास में पहली बार अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास पर महिला पहलवान भी दांव पेंच दिखाएंगी।
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महंत ने  बताया कि 57 किलोग्राम से लेकर 125 किलोग्राम वर्ग के बीच पुरुष पहलवान और महिलाएं 48 किलोग्राम से लेकर 75 किलोग्राम तक के भारवर्ग में हिस्सा लेंगी। 
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विजेता को मिलेगा यह पुरस्कार

गोस्वामी तुलसीदास अखाड़ा में पहली बार महिला मल्लों की भिड़ंत - फोटो : अमर उजाला
कुश्ती चैंपियनशिप में बनारस कुमार और बनारस केसरी की कुश्तियां आकर्षण का केंद्र होंगी। बनारस केशरी के विजेता को मोटर साइकल तो कुमार के विजेता को साइकिल और चांदी का गदा दिया जाएगा।

कुश्ती चैम्पियनशीप का उद्घाटन मंगलवार की सुबह अस्सी घाट पर महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र करेंगे । कुश्ती प्रतियोगिता  फाइनल 30 नवंबर को होगी।
पिछली बार बनारस केसरी का खिताब सनी गिरी और महिला वर्ग में बनारस केसरी का खिताब हिमांशी उर्फ शालू यादव को दिया गया था।

महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने कहा कि जब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय  फलक पर कुश्ती के क्षेत्र में महिलाएं देश का नाम रौशन कर रही है तो उन्हें पारंपरिक अखाड़ों से दूर कैसे रखा जा सकता है। पुरुषों से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में दम दिखाने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित करना ही हम सबका कर्तव्य है।
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