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आस्था: महिला श्रद्धालु ने वाराणसी के इस मंदिर में अर्पित किया हीरों का हार

Wed, 03 Nov 2021 08:53 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन के बुधवार को भक्तों की कतार लगी रही। माता के भंडारे से अन्न-धन, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति की कामना से श्रद्धालु सुबह से ही दर्शन के लिए पहुंचने लगे। धनतेरस से अन्नकूट तक मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन होंगे। 
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स्वर्णमयी माता अन्नपूर्णा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी में स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन के बुधवार को पहुंची केरल की महिला श्रद्धालु ने माता को 30 लाख रुपये की कीमत का हीरों का हार अर्पित किया। माता के दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगी रही। माता के भंडारे से अन्न-धन, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति की कामना से श्रद्धालु सुबह से ही दर्शन के लिए पहुंचने लगे। धनतेरस से अन्नकूट तक मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन होंगे। 
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मां अन्नपूर्णा का दरबार बुधवार को भी श्रद्धालुओं से गुलजार रहा। सुबह से शुरू हुआ दर्शन पूजन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। केरल के कोच्चि की रहने वाली महिला श्रद्धालु श्रीलता बिंदु माधव ने मां अन्नपूर्णा को हीरे का हार चढ़ाया। उन्होंने मंदिर के महंत शंकर पुरी को अर्पित किया। ज्वैलरी का व्यापार करने वाली श्रीलता मां अन्नपूर्णा के धनतेरस महोत्सव में शामिल होने के लिए तीन दिवसीय प्रवास पर बनारस आईं हैं।
 

धनतेरस पर अन्नपूर्णेश्वरी के दर्शन से मिलता है सौभाग्य

अन्न-धन की देवी मां अन्नपूर्णेश्वरी के दरबार में धनतेरस पर भक्तों ने सुख सौभाग्य की कामना की। मंगलवार को माता के दरबार में उनके खजाने से सिक्के वितरित किए गए। मां के दर्शन कर भक्त निहाल हुए और श्रीवृद्धि के साथ ही कोरोना के खात्मे की प्रार्थना की।

काशी विश्वनाथ के आंगन में विराजमान मां अन्नपूर्णा का दरबार मंगलवार को मंगला आरती के बाद से भक्तों के लिए खोल दिया गया। महंत शंकरपुरी ने मां की आरती उतारी। 21 डमरू की ध्वनि से माता का दरबार गूंज उठा। अन्नकूट तक भोर में चार से रात 11 बजे तक माता के दर्शन होंगे। भक्त सोमवार दोपहर से ही कतारबद्ध हो गए थे। मंगलवार देर शाम तक श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए लाइन में बारी का इंतजार कर रहे थे। 
 
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वर्ष में यहां सिर्फ चार दिन होते हैं दर्शन

मान्यता है कि काशी नगरी के पालन-पोषण के लिए देवाधिदेव ने मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी। मंदिर के गर्भगृह में मां अन्नपूर्णा की ममतामयी छवियुक्त ठोस स्वर्ण प्रतिमा कमलासन पर विराजमान और रजत शिल्प में ढले भगवान शिव की झोली में अन्नदान की मुद्रा में हैं।


दाईं ओर मां लक्ष्मी और बाईं तरफ भूदेवी का स्वर्ण विग्रह है। इस दरबार के दर्शन वर्ष में सिर्फ चार दिन धनतेरस से अन्नकूट तक ही होते हैं। पहले दिन धान का लावा, बताशे के साथ मां के खजाने का सिक्का प्रसाद स्वरूप वितरित करने की परंपरा है।
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