पैसे के अभाव में एक और खिलाड़ी जिंदगी से जंग हार गया। बनारस की रहने वाली मास्टर्स एथलीट डॉ. संगीता मिश्रा आखिरकार बीमारी से जंग लड़ते हुए हार गईं। डॉ. संगीता की किडनी खराब हो गई थी।
चिकित्सकों ने उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी थी लेकिन उसके लिए जरूरी रकम का इंतजाम नहीं हो पाया। प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापिका डॉ. संगीता को डायलिसिस और दवाओं के इंतजाम के लिए आखिरी वक्त तक नौकरी करनी पड़ी।
आखिरकार रामकृष्ण मिशन अस्पताल में उनका निधन हो गया। मास्टर्स एथलीट डॉ. संगीता उदयपुर प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका थीं। डा. संगीता ने इलाज में मदद के लिए पीएम और सीएम को भी पत्र लिखा था लेकिन कोई सहायता नहीं मिल पाई।
बीएलओ के रूप में ड्यूटी लगने पर जब उन्होंने अपनी बीमारी का हवाला देते हुए अपना नाम हटाने का आग्रह किया लेकिन उनकी इस अर्जी पर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। डॉ. संगीता के पति की वर्षों पहले मृत्यु हो गई थी। इकलौते पुत्र तेजस्वी आनंद के साथ रह रहीं डॉ. संगीता वर्ष 2016 से गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं।
कहीं से भी नहीं मिली मदद
मास्टर्स एथलीट डॉ. संगीता मिश्रा
उनकी बड़ी बहन अग्रसेन पीजी कॉलेज में मनोविज्ञान की प्रोफेसर डॉ. संध्या ओझा ने बताया कि पिछले अक्तूबर में तबीयत ज्यादा खराब होने पर संगीता को महमूरगंज स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने किडनी खराब होने की जानकारी दी।
किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए घरवालों, शुभचिंतकों से जितना बन पड़ा, पैसा इकट्ठा किया लेकिन वह पर्याप्त नहीं था। मदद के लिए पीएमओ और तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव को पत्र भेजा गया मगर कहीं से कोई मदद नहीं मिली।
बाद में हमने भाजपा सरकार में भी काफी गुहार लगाई लेकिन कोई सहायता नहीं मिल सकी। संगीता किसी तरह अंत के दिनों तक अपनी ड्यूटी करती रहीं ताकि तनख्वाह से डायलिसिस करा सकें। संगीता की हालत लगातार नाजुक होती जा रही थी और विभाग ने उनकी ड्यूटी बीएलओ में लगा दी।
एक जनवरी को खुद संगीता अपनी तबियत का हवाला देकर नाम हटवाने के लिए अधिकारियों के पास गई थीं लेकिन वहां किसी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। डा. ओझा ने बताया कि संगीता ने अंतरविश्वविद्यालयीय, राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर की एथलेटिक प्रतियोगिता में दर्जनों मेडल अपने नाम किए थे।