उसकी हालत को देखते हुए महिला अस्पताल की डॉ. आरती दिव्या ने नवजात को तत्काल कबीरचौरा स्थित महिला अस्पताल रेफर किया गया है, जबकि प्रसूता रेनू को दीनदयाल अस्पताल में ही भर्ती रखा गया है। एमएस डॉ. प्रेम प्रकाश ने बताया कि महिला पूरी तरह से स्वस्थ है। उसने गर्भधारण के बाद से अपना ध्यान नहीं रखा। जिस कारण इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है।
दीनदयाल अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरएस राम ने बताया कि सुबह 10 बजे महिला अस्पताल पहुंची थी। मुख्य द्वार पर ही उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और वहीं प्रसव हो गया। जानकारी मिलने के बाद उसे तुरंत महिला विंग में भर्ती कराया गया।
बच्चे की हालत को देखते हुए उसे तत्काल कबीरचौरा स्थित महिला अस्पताल रेफर किया गया। उधर, जिला महिला अस्पताल की चिकित्सक डॉ. अल्का सिंह ने बताया कि नवजात बच्ची सात से आठ महीने की है। उसे एसएनसीयू में भर्ती किया गया है।
खराब प्रदर्शन पर पीएचसी प्रभारी का वेतन रोका
जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की समीक्षा शुक्रवार को सीडीओ हिमांशु नागपाल ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में की। इस दौरान संस्थागत प्रसव, प्रसव पूर्व जांच और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों में खराब प्रदर्शन पर सीडीओ ने चिरईगांव पीएचसी प्रभारी का वेतन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली धनराशि सीधे खाते में भेजने को कहा।
कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। इसमें सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने उत्तर प्रदेश हेल्थ डैशबोर्ड रैंकिंग में वाराणसी को छठा स्थान मिलने की जानकारी दी। इसकी सराहना करते हुए सीडीओ ने सभी अधिकारियों को बेहतर कार्य करते रहने के लिए प्रेरित किया। सीडीओ ने चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) के अनुपस्थित रहने की स्थिति में उनके विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों के नियमित टीकाकरण में छूटे हुए परिवारों को चिह्नित कर कोटेदारों के सहयोग से टीकाकरण कराने को कहा। जिला अस्पतालों, सीएचसी पर संचालित जन औषधि केंद्रों पर मानक के अनुरूप दवाएं रखने और डाॅक्टरों को ओपीडी की पर्ची पर मुहर लगाने और मरीजों को बाहर की दवा न लिखने के निर्देश दिए। सीएमओ से इन व्यवस्थाओं की निगरानी करने को कहा।