लीला स्थल पर बाढ़ के कारण जगह कम होने से पासधारकों की संख्या को कम कर दिया गया है। तुलसीघाट से महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग की गई है। दिन में दो बजे ही रीवा घाट से प्रवेश बंद कर दिया जाएगा। सुरक्षा के लिए 400 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास की ओर से शुरू की गई यह लीला काशी के लक्खा मेलों में शुमार है। लीला की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। बाढ़ के कारण घाट पर जगह थोड़ी कम है। शनिवार की सुबह कदंब का वृक्ष संकटमोचन मंदिर से लाकर लगाया जाएगा।
1553 में अकबर आया था 500 पुरानी लीला देखने
नागनथैया की लीला का आकर्षण ऐसा था कि 1553 में सम्राट अकबर भी इस लीला को देखने काशी आया था। काशी नरेश का परिवार बजड़े पर सवार होकर हर साल लीला में शामिल होता है। गोस्वामी तुलसीदास ने भदैनी में करीब 500 साल पहले कार्तिक माह में श्रीकृष्ण लीला की शुरुआत की थी। 22 दिनों की लीला की परंपरा आज भी जारी है। इसमें भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव, पूतना वध, कंस वध, गोवर्धन पर्वत सहित कई लीलाएं होती हैं।