कोरोना संकट काल में 40 फीसदी से संक्रमण दर को सात फीसदी तक लाने वाले बनारस की चर्चा अब देश में होने लगी है। एक महीने में संक्रमण दर पर लगाम के साथ सुविधाएं बढ़ाने के चलते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने वाराणसी मॉडल को सराहा है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की दूरदर्शिता और मेहनत को इस सफलता का श्रेय भी दिया है।
दरअसल, वाराणसी में अप्रैल के दूसरे सप्ताह में कोरोना संक्रमण की दर 40 फीसदी पहुंच गई थी और अस्पतालों में संसाधनों का अभाव हो गया। आलम यह था कि लोगों को ऑक्सीजन और बेड नहीं मिलने से मौत के आंकड़े भी डरावने हो गए थे। मगर, अस्पतालों में बेड बढ़ाने के साथ ही ऑक्सीजन, बेड, वेंटीलेटर, कंसंट्रेटर, एचएफएनसी सहित जीवन रक्षक संसाधनों को संक्रमण की रफ्तार से तेज गति से जुटाया गया। मार्च महीने में कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही यहां 900 बेड अस्पतालों में थे, मगर इसे पहले 1500 और फिर 2400 किया गया। अब इसे तीन हजार करने की तैयारी है। सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट के साथ ही ऑक्सीजन एक्सप्रेस से इसकी उपलब्धता ने भी वाराणसी मॉडल को देश के सामने रखा है। इसके अलावा गांवों में डोर टू डोर जांच कराकर लक्षण वालों को घर पर दवा उपलब्ध कराने की मुहिम ने संक्रमण की रफ्तार थाम दी। वाराणसी में 70 हजार से ज्यादा रोगियों को दवा पहुंचाई जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री की सराहना के बाद अधिकारी उत्साहित हैं और उनका कहना है कि मई के अंतिम सप्ताह तक कोरोना को पूरी तरह से समाप्त करने की कोशिश की जाएगी।
काशी कोविड रिस्पांस सेंटर ने सुविधाओं के साथ जनता से सीधा संवाद स्थापित कर कोरोना संकट से निपटने में अहम भूमिका निभाई। इससे निगरानी बढ़ी और बनारस में सीएसआर फंड की उपलब्धता की वजह से काम करने में सहजता हुई। स्वत: स्फूर्त बंदी ने भी संक्रमण की रफ्तार थामी।-दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त
वाराणसी में काम की तेजी ने व्यवस्था बदली है। जिस तेजी से संक्रमण का ग्राफ बढ़ा, उसी तेजी से संसाधन जुटाए गए। पहले और दूसरे हफ्ते हम पिछड़े थे, मगर तीसरे सप्ताह हमने बैलेंस बनाया और चौथे सप्ताह हम सरप्लस हो गए हैं। वाराणसी मॉडल यही है कि सभी संसाधन द्रुत गति से जुुटाए गए।-कौशल राज शर्मा, जिलाधिकारी