वाराणसी में बुधवार को टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर मां गौरा का किया गया श्रृंगार । अमर उजाला
चल हो गौरा ऊंचे पहड़वा, भोला कऽ अंगना बोलउलेबा... की करुण-मधुर तान जैसे ही टेढ़ीनीम की हवाओं में घुली, पूरा वातावरण सुहाग और श्रद्धा के रंग में भीग उठा। काशी की सनातन परंपरा के अनुरूप गौना आयोजन के दूसरे दिन बुधवार को सुहागिनों की थाप, वैदिक मंत्रों की गूंज और मंगल गीतों की मधुर लहरियां एक साथ स्पंदित होती रहीं। जिस पालकी से बाबा गौना कराने जाएंगे, उसकी सविधि पूजा हुई। षोडशी शृंगार हुआ।
टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत के आवास पर श्रीकाशी विश्वनाथ और माता गौरा के गौना की रस्म का सिलसिला शुरू है। तेल-हल्दी की रस्म के बाद माता गौरा के सोलह शृंगार का लोकाचार हुआ। पूर्व महंत परिवार सहित काशीवासियों ने बाबा की पारंपरिक पालकी और सिंहासन का पूजन किया। पूर्व महंत कुलपति तिवारी के पुत्र और आयोजक पं. वाचस्पति तिवारी के आचार्यत्व पं. सुशील त्रिपाठी सहित पांच वैदिक ब्राह्मणों ने विधिवत अनुष्ठान कराया। बाबा के मस्तक पर सजने वाला देव किरीट भी तैयार किया गया। काठियावाड़ से आए शिव-पार्वती के राजसी परिधान भी अंतिम रूप में सजाए गए हैं।
महिलाओं ने गीतों से की सोलह शृंगार का लोक बखान
गौनहारिनों की टोली ने मंगल गीत गाते हुए माता गौरा के सोलह शृंगार का बखान किया। वहीं शिवांजलि कार्यक्रम में लोक एवं सुगम संगीत का अनूठा संगम दिखा। कलाकारों ने शिव-विवाह और गौना से जुड़े पारंपरिक गीत और नृत्य की प्रस्तुतियां दीं।