एसटीएफ की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दुर्लभ जीव तेंदुआ की हड्डियों की तस्करी होती है। इन हड्डियों का उपयोग विदेशों में शक्तिवर्धक दवाएं बनाने में किया जाता है। जिससे यह काफी ऊंचे दाम पर बिक जाती हैं। मिर्जापुर के जंगलों में रहने वाले वन वासियों के सहयोग से लकड़बग्घा की हड्डियां प्राप्त की गई थी।
इसे तेंदुआ की हड्डी बताकर बेचने वाले थे। एसटीएफ के अनुसार लकड़बग्घा को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अनुसूची-3 के अंतर्गत संरक्षित जीव के श्रेणी में रखा गया है। जिसका शिकार व इसके अंगों का व्यापार निषिद्ध है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में संरक्षित वन्य जीवों की तस्करी करने वाले गिरोह की सूचनाएं यूपी एसटीएफ को लगातार मिल रही थीं।