ऑटो में पुलिस अंकल बैठते हैं और फिर बिना किराया दिए उतर जाते हैं, वे ऐसा क्यों करते हैं। आखिरकार ऑटो वाला तो ईमानदारी से अपना काम कर रहा है, उसकी मेहनत की इतनी अनदेखी क्यों।
पुलिस की मौजूदगी के बावजूद लोग लड़कियों पर अश्लील टिप्पणियां कैसे कर लेते हैं? पुलिस ऐसे लोगों को तुरंत सबक क्यों नहीं सिखाती? ये सारे सवाल सिल्वर ग्रोव स्कूल, महेशपुर के विद्यार्थियों ने ‘पुलिस की पाठशाला’ में उठाए।
शनिवार को विद्यालय में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से ‘पुलिस की पाठशाला’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें छात्र-छात्राओं ने बेबाकी से क्षेत्राधिकारी भेलूपुर राजेश श्रीवास्तव से सवाल पूछे।
सीओ ने उनके सवालों का जवाब दिया। कहा कि वह बेहिचक शिकायत करें, उनकी बातों पर सजगता से ध्यान दिया जाएगा। वह थानाध्यक्ष से लेकर एसएसपी तक शिकायत कर सकती हैं।
विद्यालय की कक्षा आठ की छात्रा अनामिका तिवारी ने कहा कि किसी के साथ कोई घटना हो तो पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर पर फोन करने के बावजूद भी तत्काल मदद क्यों नहीं मिल पाती।
कक्षा 11 की छात्रा नेहा ने कहा कि पुलिस रुपये लेकर भ्रष्ट लोगों को छोड़ देती है। ऐसा सुनने में क्यों आता है। कानून के नजरिए से सभी पर समान कार्रवाई क्यों नहीं हो पाती।
कक्षा दस की छात्रा स्वाती ने कहा कि पुलिस मुकदमा दर्ज करने के बाद यह क्यों कहती है कि जाइए आपका काम हो गया। अब मामले की जांच की जाएगी और फिर देखा जाएगा कि क्या होना है।
कक्षा ग्यारह की राजश्री ने कहा कि जब किसी के साथ दुर्घटना होती है तो कोई भी सामान्य आदमी उसकी मदद नहीं करता। सभी सोचते हैं कि पुलिस के तामझाम में कौन फंसेगा। इस मानसिकता में बदलाव कैसे आएगा।
कक्षा दस की सुप्रिया पांडेय ने कहा कि आमजन के बीच ऐसी मानसिकता क्यों है कि पुलिस किसी वारदात के बाद ही वो भी काफी देरी से पहुंचती है।
त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं होती। कक्षा नौ की रितिका सिंह ने कहा कि महिला हेल्पलाइन नंबर 1090 युवतियों और महिलाओं के लिए कैसे मददगार है। क्या इस पर फोन करते ही प्रभावी कार्रवाई होती है।
कक्षा दस की छात्रा मुस्कान खान ने कहा कि ऑटो में पुलिस वाले बैठते हैं और फिर बिना किराया दिए उतर जाते हैं, वे ऐसा क्यों करते हैं।
आखिरकार ऑटो वाला तो ईमानदारी से अपना काम कर रहा है, उसकी मेहनत की इतनी अनदेखी क्यों। कक्षा नौ की मुस्कान राय ने कहा कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स के दुरुपयोग को रोकने की क्या व्यवस्था है और इसके गलत प्रभाव से कैसे बचा जा सकता है।
ऐसे ढेरों सवालों के जवाब पुलिस उपाधीक्षक ने दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार कि शिकायत करने में वे डरें नहीं।
पहले 100 नंबर पर सूचना दें। कुछ ही देर में पुलिस उन तक पहुंचेगी। यदि लगता है थाने की पुलिस सहयोग नहीं कर रही है। ऊपर के अधिकारियों को फोन कर सूचना दे सकते हैं।
प्रधानाचार्य से स्कूल परिसर में थानाध्यक्ष से लेकर एसएसपी का मोबाइल नंबर लिखवाने को कहा।