शासन प्रशासन की ओर से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए भले ही अनगिनत योजनाएं चलाईं जा रही हों, करोड़ों रुपये भी बजट के रूप में खर्च किए जा रहे हों, पर सारी कवायद का स्याह पहलू अभी भी यह है कि सरकारी अस्पतालों के प्रति जो नकारात्मक धारणा लोंगों के मन में सालों से बनी है, उसमें कोई खास परिवर्तन नहीं आया है।
शायद इसकी एक वजह यह भी है जब तक खुद सरकार में कार्यरत आम से खास अधिकारी और कर्मचारी खुद और अपने परिवार के लिए सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के उपयोग पर विश्वास नहीं करना। इस कारण आम जनता भी सरकारी अस्पतालों में जाने से कतराती है।
लेकिन सरकारी अमले में उच्च पदों पर बैठे अधिकारी और उनके परिजन इस नकरात्मकता को खत्म करने के लिए कदम आगे बढ़ा भी रहे हैं। पर सोच अब भी वही है कि डीएम-एसएसपी रैंक के अधिकारी अमूमन सरकारी अस्पतालों में परिजनों के इलाज को नहीं जाते हैं।
लेकिन एसएसपी प्रभाकर चौधरी की पत्नी ने शनिवार को इस मिथक को तोड़ दिया। बच्चे की तबीयत खराब होने पर शनिवार की दोपहर एसएसपी की पत्नी जिला अस्पताल दीनदयाल उपाध्याय पहुंची तो अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मचा गया। तत्काल एमएस डॉ. आरके यादव पहुंच गए। बच्चे को वायरल की शिकायत पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष तिवारी की ओपीडी में दिखाया गया। पूरे अस्पताल परिसर में यह चर्चा का विषय बना रहा।