‘बच्चों के लिए घर के बाद स्कूल दूसरा घर होता है। बच्चे स्कूल में खून से लथपथ मिलेंगे और फिर उनकी मौत हो जाएगी तो भला हम अभिभावक कहां जाएंगे, क्या करेंगे..?’ यह दर्द है सहायक अभियोजन अधिकारी प्रजेश कुमार पांडेय का।
रुंधे गले से प्रजेश कहते हैं कि मेरा बेटा प्रशांत तो सनबीम वरुणा स्कूल में 24 अगस्त को रोज की तरह हंसते-खेलते पढ़ने गया था। उसकी मां उसके घर लौटने की राह देख रही थी।
मगर, स्कूल से ही प्रशांत हम सबके लिए बहुत दूर चला गया। स्कूल परिसर में प्रशांत कोमा में गया और फिर मौत हुई तो भला इसका जिम्मेदार कौन है। पुलिस पता नहीं क्या कर रही है, कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
गाजीपुर जिले के मूल निवासी प्रजेश कुमार पांडेय का बेटा प्रशांत सनबीम स्कूल वरुणा में कक्षा 12 का छात्र था। 24 अगस्त को स्कूल की हॉस्टल बिल्डिंग के समीप प्रशांत खून से लथपथ पड़ा मिला था।
उपचार के दौरान बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में उसकी मौत हो गई थी। मामले को लेकर शिवपुर थाने में स्कूल प्रबंधन और कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।
प्रशांत के अंतिम संस्कार के बाद गांव से पिता प्रजेश परिवार के साथ वापस लौट आए हैं मगर उनकी मन:स्थिति अब भी ठीक नहीं है। प्रशांत का जिक्र आते ही प्रजेश की आंखों से आंसुओं की धार बहने लगती है और गला रुंध जाता है।
प्रजेश कहते हैं कि कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि हम कहां चले जाएं और प्रशांत को खोज लाएं। उसकी मां को कैसे समझाऊं... खुद कैसे समझूं... यह समझ नहीं पाता हूं। मेरा बेटा प्रशांत मेधावी, साहसी और समझदार था। कभी किसी से उसके विवाद या उससे जुड़ी शिकायत भी सुनने को नहीं मिली।
यदि प्रशांत ने कोई गलती की थी तो उसके बारे में हमें स्कूल की ओर से बताया जाता लेकिन ऐसी कोई बात कभी सामने नहीं आई। प्रशांत सनबीम वरुणा का टॉपर छात्र रहा है और सिर्फ अपनी पढ़ाई से मतलब रखता था।
प्रजेश ने पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि जांच निष्पक्ष तरीके से करा कर दोषियों को सजा दिलाएं। वहीं, इस संबंध में क्षेत्राधिकारी कैंट राकेश कुमार नायक ने बताया कि हमारी जांच जारी है। सभी के बयान और जरूरी साक्ष्य जुटाए गए हैं। पुलिस पारदर्शी तरीके से मामले में कार्रवाई करेगी।