वाराणसी। गेहूं के सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की कम आवक से विपणन विभाग की चिंता बढ़ गई है। चिंता की वजह अबतक 335 क्विंटल खरीद होना है। 15 जून तक हालात इसी तरह रहे तो इस साल 15 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा। ज्ञात हो कि इस वर्ष प्राकृतिक आपदा सहित कोरोना के कारण लागू लॉक डाउन के चलते गेहूं के उत्पादन क्षमता और सरकारी क्रय केंद्रों पर असर देखने को मिल रहा है। जिला विपणन विभाग अधिकारी अरुण त्रिपाठी के मुताबिक अबतक 23 दिनों में 35 क्रय केंद्रों से 1181 मीट्रिक टन ही गेहूं की खरीद की जा सकी है। जबकि पिछले वर्ष इतने ही दिनों में 8549 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी। इस बार के हालात ऐसे है कि किसान टोकन लेकर भी सरकारी क्रय केंद्रों पर नहीं आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले साल जिस जयापुर केंद्र से 8000 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई इस साल वहां से मात्र 335 क्विंटल ही अब तक खरीद हो सकी है। दरअसल कई किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर 1925 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं बेचने के बजाय बिचौलियों, और निजी उपयोग करने वालों को 2000 रुपये क्विंटल की दर बेचकर मुनाफा कमाने में जुटे है। अरुण ने बताया इस वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से 30 प्रतिशत तक गेहूं के उत्पादन में कमी के कारण भी किसान अपने खाने भर अनाज रखकर बाकी के अनाज ज्यादा से ज्यादा दाम पर बेच कर मुनाफा कमाने में जुटे हैं।