मुकदमा दर्ज कराने वाले पंडित सोमनाथ व्यास और डॉ. रामरंग शर्मा की मौत हो चुकी है। वहीं, दूसरा पक्ष अंजुमन इंतजामिया मस्जिद और अन्य हैं। पंडित सोमनाथ व्यास के स्थान पर मुकदमे का प्रतिनिधित्व कर रहे वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी के अनुसार, ज्ञानवापी क्षेत्र के विवादित परिसर में देश के द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक स्वयंभू विश्वेश्वरनाथ का शिवलिंग स्थापित है।
kashi vishwanath corridor
- फोटो : amar ujala
परिसर में ज्ञानवापी नाम का एक प्राचीन कुआं है और उसके उत्तर में विश्वेश्वरनाथ का मंदिर है। 15 अगस्त 1947 को भी विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप मंदिर का ही था। मंदिर परिसर पर कब्जा कर मस्जिद बना दी गई। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि देश की आजादी के दिन विवादित परिसर का स्वरूप मस्जिद का था।
विजयशंकर रस्तोगी ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आजादी के दिन ज्ञानवापी परिक्षेत्र के धार्मिक स्वरूप का पता लगाने के लिए ठोस साक्ष्यों, विस्तृत अध्ययन और सर्वे की जरूरत है। इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण जैसी एक्सपर्ट एजेंसी ज्ञानवापी परिक्षेत्र और यहां के भवनों का सर्वे कर रिपोर्ट दे। रिपोर्ट के आधार पर इस संबंध में फैसला किया जाए।