छह माह होते हैं विवाह योग्य
प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार साल के 12 महीनों में छह माह शुभ और मांगलिक कार्य होते हैं। बाकी छह माह त्याग के लिए हैं। इसलिए किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए मुहूर्त को होना जरूरी है।। बिना मुहूर्त के किए गए कार्य में बाधाएं आती हैं और असफलता मिलता है।
अगले वर्ष विवाह के शुभ मुहूर्त
अगले वर्ष फरवरी में 4, 8, 10, 16 व 12, मार्च में 3 व 14, अप्रैल में 9, 12, 15, 20, 21, 25 व 30 को शुभ मुहूर्त है। इसी तरह मई में 1, 3, 9, 12, 13, 14 व 21, जून में 12, 19 व 30, जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8, 11 व 12, नवंबर में 7, 20, 21, 24, 27 व 30 और दिसंबर में 1, 6, 9, 11 व 13 को लग्न है। इन तिथियों के बीच कुछ विवाह के लिए नक्षत्र मिल रहे हैं। मगर, संपूर्ण योग नहीं बन रहे।
गायत्री पंचांग में खरमास भर नहीं होंगे विवाह
गायत्री पंचांग खरमास में वैवाहिक कार्य बंद रहते हैं। गायत्री परिवार के जिला समन्वयक पं. गंगाधर उपाध्याय ने बताया कि गायत्री पंचांग में केवल खरमास में शादियां नहीं होती हैं, बाकी दिनों में शादी होती हैं। दिन में ही शादियां होती हैं। क्योंकि यज्ञ करने का विधान दिन में है रात में नहीं।