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लग्न-मुहूर्त: खरमास के नौ दिन पहले ही लगन खत्म, कल से थम जाएगी शहनाई की धुन; 55 दिन बाद फिर गूंजेगी

Sat, 06 Dec 2025 06:16 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Shubh Muhurt 2026: सात दिसंबर से तीन फरवरी तक विवाह के शुभ लग्न मुहूर्त नहीं हैं। खरमास के नौ दिन पहले ही लगन खत्म हो जाएंगे। 55 दिन बाद ही लोग वैवाहिक जोड़ें में बंध सकेंगे।
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तीन फरवरी 2026 के बाद गूंजेगी शहनाई। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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Varanasi News: विवाह के लिए शुभ लग्न 24 घंटे बाद बैंड-बाजा और शहनाई की धुन थम जाएगी। यानी सात दिसंबर से शादियां नहीं होंगी क्योंकि शुक्र अस्त हो जाएंगे। तीन फरवरी तक सभी तरह के मांगलिक कार्य ठप रहेंगे और 55 दिन बाद यानी चार फरवरी से फिर मंडप सजेंगे और वर-वधू सात फेरे लेंगे।

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सनातन धर्म में प्रत्येक कार्य के लिए एक अभीष्ट मुहूर्त का होना जरूरी है। शुभ एवं मांगलिक मुहूर्त के निर्धारण में गुरु एवं शुक्र ग्रह के उदय होना आवश्यक है। इन ग्रहों के अस्त होने पर किसी भी तरह के शुभ एवं मांगलिक कार्यों ठप हो जाएंगे। 21 नवंबर से शुरू लग्न पर कल से विराम लग जाएगा। 

प्रख्यात ज्योतिषविद और श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार छह दिसंबर तक लग्न है। इसके बाद पौषमास भी शुरू हो जाएगा। शुक्र 11 दिसंबर से एक फरवरी तक अस्त रहेंगे। इसके बाद चार फरवरी से वैवाहिक व मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।

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छह माह होते हैं विवाह योग्य
प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार साल के 12 महीनों में छह माह शुभ और मांगलिक कार्य होते हैं। बाकी छह माह त्याग के लिए हैं। इसलिए किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए मुहूर्त को होना जरूरी है।। बिना मुहूर्त के किए गए कार्य में बाधाएं आती हैं और असफलता मिलता है।

अगले वर्ष विवाह के शुभ मुहूर्त
अगले वर्ष फरवरी में 4, 8, 10, 16 व 12, मार्च में 3 व 14, अप्रैल में 9, 12, 15, 20, 21, 25 व 30 को शुभ मुहूर्त है। इसी तरह मई में 1, 3, 9, 12, 13, 14 व 21, जून में 12, 19 व 30, जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8, 11 व 12, नवंबर में 7, 20, 21, 24, 27 व 30 और दिसंबर में 1, 6, 9, 11 व 13 को लग्न है। इन तिथियों के बीच कुछ विवाह के लिए नक्षत्र मिल रहे हैं। मगर, संपूर्ण योग नहीं बन रहे।
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गायत्री पंचांग में खरमास भर नहीं होंगे विवाह
गायत्री पंचांग खरमास में वैवाहिक कार्य बंद रहते हैं। गायत्री परिवार के जिला समन्वयक पं. गंगाधर उपाध्याय ने बताया कि गायत्री पंचांग में केवल खरमास में शादियां नहीं होती हैं, बाकी दिनों में शादी होती हैं। दिन में ही शादियां होती हैं। क्योंकि यज्ञ करने का विधान दिन में है रात में नहीं।
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