बुनकरों की बेटियों ने अपने हाथों से बनाई साड़ी
- फोटो : अमर उजाला
बनारस में बुनकरों की बेटियां एक नई इबारत लिख रही हैं। कभी बुनकरी में सिर्फ मर्दों की दखल हुआ करती थी लेकिन आज उनकी बेटियां विरासत को आगे बढ़ाने में जुट गई है। सदियों पुरानी बनारसी साड़ी पर हाथों से की गई अनूठी कारीगरी की कला को अब बेटियां सीख रही हैं।
कई बनारसी साड़ियां भी उन्होंने खुद तैयार की है। ऐसी ही हुनरमंद बेटियों को मंगलवार को प्रमाण पत्र वितरित कर उनके हुनर को पहचान देने की कोशिश की गई।
द होटल गैंगेज के सीएसआर के तहत सजोई गांव की 32 बुनकर युवतियों को बनारसी साड़ी बुनने की कला में प्रशिक्षित किया गया। होटल ताज में आयोजित प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीएचयू के प्रो. अशोक कुमार कौल ने प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी युवतियों को प्रमाण पत्र वितरित किए।
ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रयास और होटल ताज के आर्थिक सहयोग से गांव की इन मुस्लिम बेटियों ने बनारसी कढ़ुआ, बुटीदार, आड़ा, जंगला, पाटली, मीनादार साड़ियां व दुपट्टे बुने जिसकी प्रदर्शनी भी यहां लगाई गई। इस दौरान युवतियों ने अपने अनुभव भी साझा किए।
नसीबुन निसां, अब्दुल हमीद, मोहम्मद इस्लाम और अब्दुल खालिक जिन्होंने उन्हें बुनकारी सिखाई वो भी यहां मौजूद थे। होटल ताज के महाप्रबंधक अश्विनी आनंद व एसोसिएशन के डॉ. रजनीकांत ने उनके हुनर को सराहा और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।