गंगा में नावों का भविष्य अब उत्तर प्रदेश अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण तय करेगा। जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्राधिकरण की ओर से लाइसेंस भी जारी किए जाएंगे। अब तक नावों का लाइसेंस नगर निगम की ओर से बनाया जाता था।
प्रमुख सचिव अतुल श्रीवास्तव ने इस आशय का पत्र जारी किया है। प्राधिकरण के अधिकारी नदियों के समृद्धि और संरक्षण को भी सुनिश्चित करेंगे। इस आधार पर जल्द ही आगामी रूपरेखा तय की जाएगी। शासन स्तर से कैबिनेट से मंजूरी के बाद के प्राधिकरण का क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी में भी खुलेगा।
प्राधिकरण के अधिनियम के तहत नदियों के आसपास की सभी प्रकार की एक्टिविटी तय की जाएगी। इसका प्रभाव काशी में गंगा के 88 घाटों पर भी पड़ेगा। गंगा में जल परिवहन को बढ़ावा देने के साथ साथ पर्यावरण का भी ख्याल रखा जाएगा। डीजल चालित नावों को गंगा से हटाकर ग्रीन एनर्जी पर बल दिया जाएगा।
अधिनियम, 2023 के तहत गंगा और अन्य नदियों में नावों, मोटरबोट और क्रूज का संचालन किया जाएगा। इस प्राधिकरण में परिवहन विभाग, वित्त विभाग, लोक निर्माण विभाग, सिचाई एवं जल संसाधन विभाग, पर्यटन विभाग, नगर निगम, जल पुलिस, पुलिस विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग, आईडब्लूएआई विभाग की ओर से नामित सदस्य होगें। इनकी ओर से नदियों में संचालित होने वाले सभी प्रकार के नावों की किराया दरें, सुरक्षा मानकों, एवं जलमार्ग से जुड़े सभी प्रकार की व्यवस्थाओं को लागू किया जाएगा।