काशी विश्वनाथ मंदिर में पान, गुटखा खाकर प्रवेश करने पर सोमवार को प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके अलावा थर्माकोल की लुटिया में बाबा को जल चढ़ाने पर भी रोक लगा दी गई। मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण के आदेश के अनुपालन में यह कार्रवाई सोमवार को अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पारस नाथ द्विवेदी ने की। नए निर्देश जारी होने के बाद देर शाम तक थर्माकोल की लुटिया में जल और दूध लेकर आने वाले सैकड़ों श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया।
बाबा विश्वनाथ के दरबार में शुचिता और शुद्धता कायम रखने के लिए मंदिर प्रशासन ने सोमवार को परिसर में पान-गुटखा खाकर प्रवेश करने और थर्माकोल की लुटिया में जल चढ़ाने पर रोक लगा दी। अब चाहे मंदिर के अर्चक, कर्मचारी, सेवादार हों या सुरक्षाकर्मी या फिर देश के कोने -कोने से बाबा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु। पान, गुटखा खाकर कोई भी मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकेगा।
आदेश जारी होने के बाद ज्ञानवापी कंट्रोल रूम के अलावा सभी सुरक्षा प्वाइंट पर इसकी जानकारी प्रसारित करवा दी गई। पान खाकर आने वाले लोगों को मंदिर में प्रवेश न करने देने की हिदायत दी गई है। इसके अलावा थर्माकोल की लुटिया की जगह अब तांबा, पीतल, स्टील या कांसे के पात्र में ही जल लेकर आने वाले भक्त बाबा को जलाभिषेक कर सकेंगे। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि मंदिर परिसर में स्वच्छता और शुद्धता कायम रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। मंदिर प्रशासन परिसर में ही तांबे, पीतल के पात्र भी उपलब्ध कराएगा, ताकि जो भक्त बाहर से ऐसे पात्र लेकर मंदिर न आ सके हों उन्हें जल चढ़ाने की सुविधा मुहैय्या कराई जा सके।
रानी भवानी गली से अब आम श्रद्धालु भी कर सकेंगे आवाजाही
वाराणसी। अरसा बाद खोली गई रानी भवानी गली से आम श्रद्धालु भी अवाजाही कर सकेंगे। अभी तक इस गली से सिर्फ सुरक्षा कर्मी और मंदिर के कर्मचारी, सेवादार ही गुजर रहे थे। मंडलायुक्त के निर्देश पर मंदिर प्रशासन ने सोमवार को आम भक्तों के लिए भी इस गली से आवाजाही करने की छूट दे दी। अब मंदिर में दर्शन करने वाले भक्त सरस्वती फाटक न जाकर इस गली से होकर छत्ताद्वार से बाहर निकल सकेंगे।