उन्होंने बताया कि मंदिर प्रशासन एक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, जिसके जरिए श्रद्धालुओं को अधिक सहज और संतोषजनक अनुभव प्रदान किया जाएगा। इस डेटा के उपयोग से भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और समन्वय को बेहतर बनाया जा सकेगा। नई व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसकी शुरुआत एक मई के बाद की जा रही है।
हालांकि, मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था फिलहाल केवल विशेष सेवाओं—जैसे सुगम दर्शन, अभिषेक और मंगला आरती—के लिए लागू होगी। सामान्य श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क दर्शन की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वे पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के दर्शन कर सकेंगे।
इसके अलावा, काशीवासियों के लिए विशेष द्वार से सुबह और शाम निशुल्क दर्शन की व्यवस्था भी यथावत जारी रहेगी। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा प्रदान करना, उनकी विविधता को समझना और सुरक्षा को और मजबूत बनाना है।