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Varanasi News: पुलिस टीम पर फायरिंग के मामले में 4 दोषी, सात सात साल की सजा; 13 साल बाद आया फैसला

Fri, 01 May 2026 12:25 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: इस मामले की सुनवाई के दौरान अरुण उर्फ नखड़ू और अजय यादव ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उनकी पत्रावली अलग कर दी गई। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने चारों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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वाराणसी कोर्ट। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Varanasi Crime: चेकिंग के दौरान पुलिस अधीक्षक (अपराध) और उनकी टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या का प्रयास करने के मामले में अपर जिला जज (पंचम) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने चार अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सख्त सजा सुनाई है। अदालत ने अमित सिंह उर्फ सोनू, धीरज पाल, सन्नी सोनकर और विशाल को सात-सात वर्ष के कारावास तथा 10-10 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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इसके साथ ही अदालत ने अवैध असलहा बरामद होने के आरोप में चारों अभियुक्तों को दो-दो वर्ष के अतिरिक्त कारावास और तीन-तीन हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी ओंकार नाथ तिवारी और विनय कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।

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ये है पूरा मामला

अभियोजन के अनुसार, 12 नवंबर 2013 को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (अपराध) कमलेश दीक्षित अपनी टीम के साथ वांछित और इनामी अपराधियों की धरपकड़ के लिए लहरतारा ओवरब्रिज पर चेकिंग अभियान चला रहे थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि लूट और चोरी की घटनाओं में शामिल कुछ बदमाश मंडुवाडीह की ओर से तीन बाइकों पर सवार होकर आ रहे हैं। पुलिस टीम ने संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन घेराबंदी देख बदमाश बाइक छोड़कर भागने लगे और पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।

फायरिंग के दौरान चली एक गोली पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित की बुलेटप्रूफ जैकेट के बाईं ओर लगी, जिससे वे बाल-बाल बच गए। इसके बाद पुलिस टीम ने पीछा कर छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके पास से अवैध असलहा व कारतूस बरामद किए।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चार अभियुक्तों के साथ अरुण उर्फ नखड़ू और अजय यादव के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अरुण उर्फ नखड़ू और अजय यादव ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया, जिसके चलते उनकी पत्रावली अलग कर दी गई। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने चारों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले को पुलिस पर हमले जैसे गंभीर मामलों में कड़ा संदेश माना जा रहा है।
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