भदोही सांसद और भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मस्त ने भूतपूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के बारे में अपने बयान ‘यशवंत सिन्हा अर्थशास्त्री नहीं अनर्थ शास्त्री थे’ पर कायम हैं। उन्होंने कहा है कि मैं उन्हें अच्छी तरह जानता हूं।
स्वदेशी आंदोलन के दौरान उनके साथ काम किया है। ये लोग स्वार्थ की खातिर पार्टी पर दबाव बनाने के लिए ऐसा बयान देते हैं। यशवंत सिन्हा को अनर्थ शास्त्री का तमगा देकर सियासी गलियारे में हलचल मचा चुके मस्त ने बृहस्पतिवार को अमर उजाला से बातचीत में कहा कि यशवंत सिन्हा कांग्रेस की भाषा बोल रहे हैं।
वह कहते हैं कि बीजेपी के लोग डर रहे हैं और बोल नहीं रहे हैं। जबकि उन्हें समझना चाहिए कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। प्रधानमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की दूरगामी सोच से देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अगर बीजेपी के लोग डर रहे होते तो शायद मैं किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष न होता। कहा कि वित्तमंत्री रहते हुए यशवंत सिन्हा ने खुद सोना गिरवी रखा था। भाजपा से उनका जुड़ाव अवसरवादिता की परिणति है। जिसके पास राजनीतिक पवित्रता नहीं है, वह आर्थिक पवित्रता की बात क्या करेगा।