बलिया में पुलिस की निष्क्रियता के चलते जनपद में दस दिनों के अंदर दूसरी बार दो समुदायों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। सिंकदरपुर बवाल मामले में की गई पुलिस की पूरी कार्रवाई कटघरे में है।
कहा जा रहा है कि ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण ही अराजकतत्वों के हौसले बढ़े हैं जिसकी वजह से बुधवार को रतसर कस्बे में एक बार फिर दोनों समुदायों के अराजकतत्व अपनी मनमानी कर गए।
गौरतलब है कि 30 सितंबर को सिकंदरपुर कस्बे के जल्पा चौक पर दशहरा मेले में महिला के साथ हुई छेड़खानी को चौकी इंचार्ज ने गंभीरता से नहीं लिया और तीन दिनों तक पूरा कस्बा जलता रहा।
घटना के दो दिन बाद सिकंदरपुर पुलिस चौकी प्रभारी को और चार दिन बाद थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर किया गया। दस दिनों बाद सिकंदरपुर चौकी प्रभारी को निलंबित किया गया।
हैरानी की बात है कि वर्ग संघर्ष जैसे संगीन मामले की जांच में पुलिस में इतने दिन लग गए और तब जाकर चौकी प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की गई। यही नहीं तीन दिनों तक कस्बे में उत्पात मचानेवालों के मामले में भी पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
पुलिस अभी उस मामले में उलझी ही थी बुधवार को रतसर बाजार में भी दो वर्गोँ में संघर्ष हो गया और कई दूकानें आग के हवाले कर दी गई। यहां भी पुलिस की निष्क्रियता की ही बात सामने आई है जिसके चलते इतना बड़ा बवाल हो गया।
मंगलवार की रात को ही चौकी प्रभारी ने मामले को गंभीरता से लिया होता तो शायद इस बवाल की नौबत ही नहीं आती। हालांकि सिकंदरपुर बवाल मामले से लिए गए सबक का असर रतसर में जरूर दिखा। जब पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की।
लापरवाही बरतने में एसपी ने रतसर चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया है। 22 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है और सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलानेवालों पर सख्ती के संदेश के साथ राजनीतिक दलों के लोगों का कस्बे में प्रवेश प्रतिबंधित कर देेने जैसे कदम उठा कर उपद्रवियों को संदेश दे दिया है।