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38.67 लाख बरामद, चलन में ना रहे 500 के नोट भी मिले

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38.67 लाख बरामद, चलन में ना रहे 500 के नोट भी मिले
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वाराणसी। एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार शराब कारोबारी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता के गोदाम से 38 लाख 67 हजार 250 रुपये बरामद हुए। वह यह नहीं बता पाए कि लॉकडाउन में यह रुपये कहां से आए। इसके अलावा 500-500 के 27 नोट ऐसे मिले जो अब प्रचलन में नहीं हैं। साथ ही नोट गिनने की मशीन, 24 क्यूआर कोड, 91 बोतल अंग्रेजी शराब, 37 बोतल अद्धा अंग्रेजी शराब, 192 क्वार्टर शीशी शराब, 92 बोतल बीयर, तीन मोबाइल सहित अन्य सामग्रियां मिली हैं। राजेंद्र के अलावा उसके दामाद सोनभद्र के दुद्धी थाना के दुदही गांव निवासी विनोद कुमार जायसवाल और कर्मचारी बिहार के सीतामढ़ी निवासी मुकेश कुमार को गिरफ्तार किया है। प्रकरण में राजेंद्र की पत्नी सरोज और गोदाम के अन्य कर्मचारियों की तलाश है। इसके अलावा सारनाथ थाने की पुलिस द्वारा सिपाही प्रमोद कुमार गौड़ और प्रवीण शुक्ला उर्फ पिंटू को गिरफ्तार किया गया है। प्रमोद और प्रवीण के पास से छह पेटी अंग्रेजी शराब, 24730 रुपये और एक एक्सयूवी बरामद की गई है।
डायरी में सफेदपोशों से लेकर अफसरों के नाम, मंत्री ने किया फोन
शराब कारोबारी राजेंद्र का मन यूं ही नहीं बढ़ा था। दरअसल, पुलिस ने मंगलवार की रात छापा मारा तो राजेंद्र के पास से जो डायरी बरामद हुई उसमें जिला और मंडल स्तरीय अधिकारियों के साथ ही शहर के चुनिंदा क्लबों को लॉकडाउन में दी गई शराब का विवरण भी मिला। और तो और, राजेंद्र की गिरफ्तारी की सूचना पर जिला निवासी एक मंत्री ने पुलिस और प्रशासन के आला अफसरों को फोन कर अर्दब में लेने की कोशिश की थी। अफसरों ने जब बताया कि मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में है तो मंत्री शांत हुए। इसके बाद मंत्री ने कहा कि अच्छी कार्रवाई करें ताकि लोगों में एक अच्छा संदेश जाए।
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अवैध शराब भी खपाई जाती थी इस खेल में
शराब कारोबारी के यहां से लॉकडाउन में शराब की अवैध बिक्री के खेल में अवैध शराब भी खपाई जा रही थी। कैंट इंस्पेक्टर ने बताया कि शराब के थोक व्यापार की आड़ में क्यूआर कोड फाड़ कर शराब की अवैध बिक्री की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध शराब की खपत से इनकार नहीं किया जा सकता है। तफ्तीश में सारा मामला स्पष्ट होगा तो उसके आधार पर अलग से कार्रवाई होगी।
शराब के सात थोक व्यापारियों में से एक है राजेंद्र
जिला प्रशासन में अनुसार, जिले में विदेशी मदिरा और बीयर के सात थोक कारोबारी हैं। उनमें से एक राजेंद्र ने अपनी पत्नी सरोज के नाम ठेका ले रखा है। राजेंद्र के अनुसार उसके पास शराब का थोक का ठेका है, आबकारी विभाग और पुलिस के वाहन उसके गोदाम ओआर अक्सर आते जाते थे, इस वजह से उस पर कभी किसी को शक नहीं होता था। लॉकडाउन में शराब की किल्लत बढ़ी तो उसे लगा कि यह पैसा कमाने का एक अच्छा अवसर है। इसी वजह से पहले अपने परिचितों और फिर बाजार में शराब बेचने के लिए वह देने लगा।
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जिसके खिलाफ मिलेगा साक्ष्य वह आएगा कार्रवाई की जद में
एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने कहा कि शराब कारोबारी के घर में लगे सीसी कैमरों का डीवीआर खंगाला जा रहा है। उसके पास से मिली डायरी और मोबाइल पर हुई चैटिंग की भी जांच कराई जा रही है। जो कोई भी इस प्रकरण में दोषी मिलेगा वह कार्रवाई की जद में आएगा। एसएसपी ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी गलती शराब कारोबारी की है। पुलिस और आबकारी विभाग के कर्मचारियों की भूमिका को जांच अलग से कराई जा रही है। इस प्रकरण में जिस किसी की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होगी वह हर हाल में जेल जाएगा।
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