वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में बीएससी के छात्रों ने मंगलवार को प्रैक्टिकल फीस लेने, छात्रसंघ चुनाव कराने के साथ ही कॉपियों के मूल्यांकन में अनियमितता का मुद्दाउठाया। प्रैक्टिकल फीस के रूप में 500 रुपये लेने का आरोप लगाते हुए कुलपति से कार्रवाई की मांग की। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने फीस न लेने का फैसला किया है।
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काशी विद्यापीठ में बीएससी थर्ड सेमेस्टर में गणित से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों से 500 रुपये के प्रैक्टिकल शुल्क लेने का आदेश जारी हुआ था। इस फैसले से छात्र नाराज थे। सोमवार को छात्रों ने प्रदर्शन भी किया था। साथ ही मंगलवार को प्रशासनिक भवन के चैनल गेट पर धरने पर बैठ गए। किसी को अंदर, बाहर नहीं जाने दे रहे थे। छात्रों का कहना था कि जब मैथ की पढ़ाई ही थर्ड सेमेस्टर में नहीं होती है तो फीस क्यों ली जा रही है। इसके अलावा परीक्षा फॉर्म में आधार कार्ड और बीए फर्स्ट सेमेस्टर के रिजल्ट की कॉपी लगाने को कहा गया है, लेकिन रिजल्ट में अब तक संशोधन न होने से परीक्षा फॉर्म भरने में परेशानी होगी। छात्रों ने कहा कि प्रथम सेमेस्टर के परिणाम के बाद बहुत सारे विद्यार्थियों को अनुपस्थित दिखा दिया गया था और उन्हें अनुत्तीर्ण भी कर दिया गया था। इसमें संशोधन जरूरी है। कुलपति प्रो. एके त्यागी का कहना है कि छात्रों से प्रैक्टिकल शुल्क लेने की जानकारी मिली थी। जानकारी मांगने पर पता चला कि मैथ में प्रैक्टिकल नहीं है। ऐसे में 500 रुपये लेने का फैसला वापस ले लिया गया है। फिलहाल छात्र मान गए थे, अब प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं, यह समझ से परे हैं।