मुख्यमंत्री विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक सरस्वती भवन में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों में रास पंचाध्यायी, भागवतगीता एवं दुर्गासप्तशती (विशेष कपड़े में लिखी गई) स्वर्ण अक्षरों एवं स्वर्ण कलाओं से युक्त को देखकर भाव विभोर हुए। उन्होंने भारतीय संस्कृति के धरोहर को संरक्षित करने के अभियान को निरंतर जारी रखने तथा विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे इस प्रयास की सराहना भी की।
छात्रावासों का किया निरीक्षण, दिए निर्देश
मुख्यमंत्री ने विस्तार भवन में भारत सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन द्वारा पांडुलिपियों के संरक्षण के कार्य का भी अवलोकन किया। छात्रावासों का निरीक्षण करते हुए क्रमश: शोध छात्रावास एवं गंगानाथ झा छात्रावास देखा। गंगानाथ झा छात्रावास का निरीक्षण करने के बाद वहां पर साइकिल स्टैंड एवं गाड़ी स्टैंड बनाये जाने का निर्देश देते हुये स्वच्छता, जर्जर तारों को बदलने सहित अन्य जरूरी कार्यों को कराने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान स्टांप एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल, आयुष एवं खाद्य सुरक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, विकास प्राधिकरण के मानद सदस्य अंबरीश सिंह भोला, जिलाधिकारी एस. राजलिंगम, अपर पुलिस कमिश्नर एस चनप्पा सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
निरीक्षण के बाद पहुंचे बाबा दरबार
मुख्यमंत्री संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के निरीक्षण करने के पश्चात श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एवं काशी के कोतवाल काल भैरव मंदिर में दर्शन पूजन करने पहुंचे। मंदिर के अर्चकों ने विधि-विधान से पूजन कराया। इसके बाद वह अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए।