Varanasi News : वाराणसी के मंडुवाडीह की एक बिल्डिंग में हुए लिफ्ट हादसे के बाद वीडीए ने भी अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। कागजी कार्रवाई कर बिल्डर साफ बच जाते थे। अब ऐसा नहीं होगा। वीडीए ने नया नियम बनाया है जिसके तहत अब कोई हादसा होने पर बिल्डर पर भी एफआईआर दर्ज किया जाएगा।
बिल्डर एग्रीमेंट तहत बनने वाले भवनों में हादसा या अन्य गड़बड़ी में अब बिल्डर की जवाबदेही तय की जाएगी। उन पर एफआईआर भी दर्ज होगा। दरअसल नियमानुसार कागजात में भवन स्वामियों का नाम होता है। यही कारण है भवन स्वामी पर कार्रवाई की जाती है। लेकिन अब नए नियम में बिल्डरों पर शिकंजा कसेगा।
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शहर में पुरानी बिल्डिंग में 60:40 के हिसाब से बिल्डर और भवन स्वामी विकास कार्य करा रहे हैं। निर्माण कार्य के दौरान होने वाले हादसे में बिल्डर बच निकलते हैं। प्राय: यह देखा जाता है कि डेवलपमेंट अथॉरिटी से ऐसे नक्शे की स्वीकृति जारी की जाती है। जो वास्तविक भू स्वामी होते हैं। जबकि इस जमीन पर भू स्वामी पैसा नहीं लगाता है। पैसा बिल्डर लगाता है। यदि जमीन का मालिक निर्माण के लिए किसी बिल्डर से करार करता है तो वह उपभोक्ता कहलाएगा।
यदि जमीन मालिक का निर्माण पर कोई नियंत्रण नहीं है तो वह उपभोक्ता की श्रेणी में है। निर्माण कार्य पर नियंत्रण बिल्डर का होता है। बिल्डर भू स्वामियों से एग्रीमेंट करने के दौरान कई पेच फंसा देते हैं। ज्यादातर कागजों में भवन स्वामी का नाम होता है।
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ऐसे में यदि कोई हादसा हुआ तो जेल जाने की नौबत भू स्वामी की होती है। ऐसे में बिल्डर आसानी से नियमों का फायदा उठाते हैं। कई बार तो इसे लेकर भू स्वामी और बिल्डरों में विवाद हो जाता है। मामला थाने से होकर कोर्ट तक पहुंच जाता है। इसे देखते हुए वीडीए ने नियमों को शिथिल किया है।
बोले अधिकारी
भू स्वामी बिल्डर एग्रीमेंट के तहत यदि विकास कार्य भू स्वामी से इतर व्यक्ति कराता है तो उसे वीडीए पक्षकार बनाएगा। उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 27 एक के तहत कार्रवाई की जाएगी। - पुलकित गर्ग, वीडीए उपाध्यक्ष