खरीदारों को झांसा देकर डेवलपर्स करोड़ों कमाते रहे। जहां भी जैसे भी जमीन मिली, प्लाटिंग कर दी लेकिन वीडीए सहित अन्य जिम्मेदार संस्थाओं के नौकरशाह सोते रहे। आपको जानकर हैरत होगी कि वीडीए के बिना किसी एप्रूवल के प्लाटिंग का खेल बाबतपुर, चौबेपुर और चोलापुर तक फैल चुका है।
डेवलपर्स एनएच-टू के साथ-साथ शहर से लगे सभी हाईवे के किनारे अवैध कॉलोनियों का जाल बिछाने में जुटे हैं। लंबे अरसे से चल रहे जमीन की प्लाटिंग के खेल ने न सिर्फ अवैध कॉलोनियों की भरमार कर दी है बल्कि बुनियादी सुविधाओं का ढांचा चरमराने की भी ये बड़ी वजह है।
सिर्फ मोहन सराय से अलीनगर (राष्ट्रीय राजमार्ग-दो) पर ही अवैध कॉलोनियों का जाल नहीं बिछा बल्कि वाराणसी से लखनऊ-जौनपुर, गोरखपुर और आजमगढ़ हाईवे पर भी दर्जनों कॉलोनियां आबाद कर दी गई हैं। प्लाटिंग का काम धड़ल्ले से चल रहा है।
सबसे ज्यादा प्रभावित वाराणसी से लखनऊ वाया जौनपुर (एनएच-56) मार्ग है। डेवलपर्स किसानों से सस्ते रेट में जमीन खरीदकर कई गुना अधिक कीमतों पर मनमानी प्लाटिंग कर रहे हैं।
बाबतपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और बनारस से सीधे लखनऊ जाने का सड़क मार्ग होने के नाते यहां प्लाट की मांग भी अधिक है। वाराणसी से गोरखपुर वाया गाजीपुर (एनएच - 29) पर भी यही हाल है।
गाजीपुर मार्ग पर पिछले पांच साल में पहड़िया मंडी से लेकर चौबेपुर तक मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों की बाढ़ आ गई है। सारनाथ के बरईपुर, सारनाथ रेलवे स्टेशन के पास, संदहा, उमरहा तक अवैध कॉलोनियों का कारोबार बढ़ता जा रहा है। वाराणसी से आजमगढ़ (एनएच-233) मार्ग पर कई डेवलपर्स पांव जमा चुके हैं।
दूसरी ओर वीडीए द्वारा जो कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं, वहां सीवर-पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का कहीं अता-पता नहीं है। वरुणापार में सीवर लाइन नहीं बिछाई जा सकी है।