सुनियोजित विकास की जिम्मेदारी वाले विकास प्राधिकरण की ज्यादातर योजनाएं फाइलों में अटकी हुई हैं। आलम यह है कि 19 साल पहले बनी ट्रांसपोर्ट नगर (टीपी नगर) योजना जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया के बाद भी परवान नहीं चढ़ पाई। इसी तरह, नई काशी योजना की बात सर्वे से आगे नहीं बढ़ पाई। शहर के अंदर मोहल्ले के विकास के लिए बना लोकल एरिया प्लान भी फाइलों में दबकर रह गया। चिंता की बात यह भी है कि इन योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। जबकि इन परियोजनाओं पर अमलीजामा से पहले विकास प्राधिकरण ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति कुछ इस तरह है।
आधी जमीन ही अधिग्रहित, फिर अटकी परियोजना
शहर को जाम से मुक्त करने के लिए वर्ष 1998 में टीपी नगर का प्रस्ताव बनाया गया। वर्ष 2000 में जमीन अधिग्रहण के लिए गजट जारी किया गया। अप्रैल 2003 में मोहन सराय के चार गांवों के किसानों से 45 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई, मगर दूसरे किसानों के विरोध के चलते वीडीए इन जमीनों पर कब्जा नहीं कर पाया। जबकि टीपी नगर के लिए 89 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई थी। उस वक्त इन जमीनों के मुआवजे के रूप में 37 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। करीब दो साल पहले तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल पांडेय ने टीपी नगर के लिए अधिग्रहित जमीन पर कब्जे के साथ यहां आवासीय योजना शुरू करने की योजना बनाई थी। मगर, अफसरों के बदलाव के बाद फिर पूरी कवायद शांत हो गई।
एक नजर में टीपी नगर
- 1998 में ट्रांसपोर्ट नगर का बना प्रस्ताव
- 18 दिसंबर 2000 को जमीन अधिग्रहण के लिए गजट
- 82 करोड़ है प्रोजेक्ट की लागत
- 37 करोड़ की खरीदी गई जमीन
- 1194 किसानों की ली गई जमीन
- 89 हेक्टेयर जमीन पर होगा निर्माण
- 45 हेक्टेयर जमीन हुई अधिग्रहित
- 48 फीसदी किसानों ने लिया मुआवजा
बाधा - अफसरों की लापरवाही और उदासीनता के चलते किसानों से संवाद ही नहीं हो पा रहा है। अधिग्रहित जमीन पर भी कब्जा लेने का प्रयास नहीं।
धरातल पर नहीं उतर पाई नई काशी की परिकल्पना
अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त शहर बसाने के लिए विकास प्राधिकरण ने नई काशी की परिकल्पना की थी। रिंग रोड के किनारे 800 करोड़ की लागत से करीब 329 हेक्टेयर में ग्रीन बेल्ट के साथ ग्रुप हाउसिंग, प्लॉट, कामर्शियल क्षेत्र, मॉल, होटल, स्टेडियम सहित अन्य सुविधाएं विकसित करने की योजना थी। मगर किसानों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप की तरफ लाया गया। इसमें ड्रोन सर्वे के अलावा अमृत योजना के तहत किए गए सर्वेक्षण में करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बाद भी योजना धरातल तक नहीं पहुंच पाई है।
एक नजर में नई काशी
- रिंग रोड किनारे 329 हेक्टेयर में बसाई जानी है नई काशी
- लैंड पूलिंंग और अधिग्रहण में 800 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना
- सुनियोजित ग्रुप हाउसिंग, प्लॉट और कामर्शियल क्षेत्र की सुविधाएं होंगी विकसित
- शहर में बढ़ते आवासीय भार को कम करने में मददगार होगी नई काशी
बाधा - प्रभावी योजना बना पाने की नाकामी, किसानों से संवादहीनता, परियोजना को परवान चढ़ाने में अफसरों की कम रुचि।
लोकल एरिया प्लान भी अटका
पुरानी काशी को संवारने के लिए बनाया गया लोकल एरिया प्लान भी लागू नहीं हो पाया। मार्च 2020 में इसके लिए सूरत की एक कंपनी से सर्वे कराया गया था और जुलाई से इसे लागू करने की योजना थी। मगर, इस बीच कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते सर्वे में देरी हुई। सर्वे रिपोर्ट तो आई, मगर उसे फाइलों में ही दबा दिया गया। जबकि इस योजना के लागू होने के बाद शहर में ढाई मंजिल के नियम में ढील कर साढ़े तीन मंजिल तक भवन निर्माण की योजना थी। लक्सा इलाके को पहले चरण के लिए चयनित किया गया था। मगर, यह प्लान भी बनने से पहले ही अटक गया।
एक नजर में लोकल एरिया प्लान
- लक्सा इलाके के पुराने और जर्जर भवनों को हटाकर नए निर्माण की थी योजना
- बिना किसी को विस्थापित किए बुनियादी सुविधाओं के साथ सोसाइटी विकसित करने का प्रस्ताव
- स्मार्ट सिटी के रीडेवलपमेंट प्लान के तहत किया जाना था सुनियोजित विकास
- सूरत की डिजाइन प्वाइंट कंसलटेंट को मिली थी सर्वे की जिम्मेदारी
- सेंट्रल फार इंवायरमेंटल प्लानिंग एंड टेकभनोलाजी अहमदाबाद से लिया गया था सहयोग
विकास प्राधिकरण की प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा कराई जाएगी। इसमें आने वाली बाधाओं को चिह्नित कर समाधान कराया जाएगा।
- दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त