कोच, डाइट मिले तो बने बात
खिलाड़ियों का कहना है कि ओलंपिक स्तर के आधुनिक गद्दे, कुशल कोच, खानपान और हॉस्टल की सुविधा मिले तो मेडल का सफर आसान हो सकता है। लेकिन सुविधाएं नहीं मिलने पर बनारस में कुश्ती को लेकर न तो खिलाड़ियों में उत्साह है न उनके परिजनों में और न ही खेल विभाग को कोई दिलचस्पी है। जिसकी वजह से टोक्यो ओलंपिक में एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, निशानेबाजी और हॉकी में पूरे यूपी से 10 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया, लेकिन इसमें कुश्ती का कोई भी नहीं है।
पहलवान पूजा यादव ने बताया कि पहलवानों को सिर्फ जिले की खेल सुविधा मिलती है वह नाकाफी है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण और खुराक मिले तो काशी के पहलवान हर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर सकते हैं।
पहवान विक्की ने बताया कि हरियाणा और पंजाब की तरह अगर यूपी के पहलवानों को भी खेल के साथ नौकरी, प्रोत्साहन और सहयोग मिले तो प्रति वर्ष राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार होंगे।