इसके बाद बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के साथ मिलकर मोहनसराय प्रयागराज (एनएच-19) पर बंजर जमीन पर फर्जी तरीके से कोले यादव ने नाम चढ़वा लिया। इसके बाद भूमि अधिग्रहण के दौरान (29-बी) में आरोपियों ने 2.19 करोड़ मुआवजा ले लिया। इस मामले की शिकायत अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार से की गई तो उन्होंने इसकी जांच कराई और बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। इस मामले में मार्च 2021 में मुकदमा दर्ज किया गया।
अपील खारिज होने के बाद लेखपाल ने लगाई रिपोर्ट
बंजर जमीन को लेकर कोले समेत अन्य लोगों ने तत्कालीन बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी पुनीत शुक्ला (वर्ष 2009) के कोर्ट में अपील की। यहां भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली और विपक्षी के आवेदन को निरस्त करते हुए बंजर जमीन घोषित कर दिया था। डीडीसी के यहां भी अपील स्वीकार नहीं की गई। कोले यादव की मृत्यु के बाद लेखपाल ने उनके पुत्र कमलेश यादव, बृजेश यादव, राजेश यादव, अखिलेश यादव व धाधेश्वर यादव तथा उनके पत्नी को वारिस घोषित करते हुए रिपोर्ट लगा दी। फर्जीवाड़ा का खुलासा होने के बाद इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि मुआवजा वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कराई गई है। इसके लिए न्यायालय के माध्यम से प्रक्रिया चल रही है। बंजर जमीन को सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराया जा चुका है।