काशी से मानसून के लौटने से पहले ही जून-जुलाई में बारिश के घाटे की भरपाई सितंबर ने अकेले ही कर दी। चार महीने के 120 दिनों में 979.7 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य 812 मिमी से 22 फीसदी ज्यादा रही। मानसून के पीक जुलाई महीने से भी दोगुना बारिश सितंबर और करीब तीन गुना अगस्त में हो गई। वहीं सितंबर के 30 दिनों में नॉर्मल से 76 फीसदी ज्यादा 346.5 मिमी और अगस्त में 83 फीसदी ज्यादा 447.9 मिमी पानी बरसा। दूसरी ओर जुलाई में इस बार सामान्य से 35 फीसदी कम 178.5 मिमी ही बरसात हुई, जबकि इन दिनों 274.9 मिमी बारिश होनी थी। सितंबर में सामान्य बारिश का आंकड़ा 197 मिमी है।
अगस्त में 83 फीसदी ज्यादा 447.9 मिमी बारिश
इस बार अगस्त में 83 फीसदी ज्यादा 447.9 मिमी हुई, जबकि सामान्य तौर पर 245.1 मिमी पानी बरसना था। यह सितंबर महीने से सिर्फ 101 मिमी ही ज्यादा रहा। वहीं जून में 95.1 मिमी के बजाय 6.8 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य से 93 फीसदी नीचे रही।
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इस महीने को लार्ज डेफिसिट यानी कि अत्यधिक बारिश घाटा वाले महीने की सूची में डाला गया है। इस बार जून महीने में मानसून काशी तक पहुंच ही नहीं पाया था। एक जुलाई को मानसून ने काशी की सीमा में दस्तक दी थी। इसके बावजूद जुलाई की बारिश को डेफिसिट कटेगरी यानी कि बारिश घाटा वाले महीने में डाल दिया गया।