बदलते बनारस में रियल इस्टेट से जुड़ी 20 परियोजनाओं पर वाराणसी विकास प्राधिकरण के ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम के सॉफ्टवेयर ने ब्रेक लगा रखा है। सॉफ्टवेयर में बनारस की प्रस्तावित सबसे ऊंची तीन इमारतें भी नक्शे की स्वीकृति के इंतजार में हैं। इन परियोजनाओं के शुरू नहीं होने से दो हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश भी अटक गया है। तहसील, नगर निगम और अग्निशमन सहित अन्य विभागों की एनओसी लेकर बिल्डर्स तीन-तीन साल से नक्शा पास कराने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। मगर, सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों के चलते नक्शों पर आपत्तियों की परत चढ़ती जा रही है।
सुनियोजित विकास की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरण में ऑनलाइन नक्शों की स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू कराई गई है। इस प्रक्रिया के वाराणसी में लागू होने के बाद वाराणसी जिले में 20 से ज्यादा प्रोजेक्ट अटक गए हैं। नक्शों की स्वीकृति के लिए विकासकर्ता बीते तीन साल से परेशान हैं। दरअसल, सॉफ्टवेयर में ग्रुप हाउसिंग के नक्शे को अपलोड करने के बाद उसकी पड़ताल की जाती है। इसके बाद सबसे पहले प्री डीसीआर की अनुमति दी जाती है। फिर फायर, बिजली, नगर निगम, प्रदूषण, पर्यावरण, तहसील, संपत्ति, लैंडयूज सहित अन्य विभागों की एनओसी सॉफ्टवेयर में अपलोड करने का नियम है।
प्री डीसीआर और एनओसी के बीच भी लंबा समय
सॉफ्टवेयर में नक्शे का प्री डीसीआर अप्रूव होने के बाद अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की मांग की जाती है और कई विभागों की एनओसी होने के कारण इसमें तीन चार महीने का समय लग रहा है। इस बीच वह नक्शा वीडीए के पोर्टल पर नहीं दिखाई देता है और एनओसी अपलोड करने के बाद वह विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के समक्ष आता है। यहां फिर से जांच और पड़ताल की लंबी प्रक्रिया में किसी तरह की आपत्ति पर फिर से नए सिरे से काम शुरू करना पड़ता है।
नक्शा पास होने में मैन्युअल और ऑनलाइन का झगड़ा
दरअसल, सॉफ्टवेयर में बिल्डिंग निर्माण के मानक अपलोड हैं और उसी आधार पर नक्शा पास कराने के आवेदन की पड़ताल ऑनलाइन होती है। मगर, एनओसी अपलोड होने के बाद मैन्युअल जांच में कई ऐसी आपत्तियां की जा रही हैं, जिन्हें सॉफ्टवेयर ने स्वीकृत किया है। ऑनलाइन नक्शों का आवेदन करने वाले विकासकर्ताओं के अनुसार सॉफ्टवेयर शेडबैक में पार्किग की अनुमति देता है और मैन्युअल पड़ताल में इस पर आपत्ति लगाई जा रही है। ग्रुप हाउसिंग के किसी एक हिस्से में व्यावसायिक गतिविधि के प्रस्ताव पर सॉफ्टवेयर पूरे नक्शे पर कॉमर्शियल फीस निर्धारित करता है। मैन्युअल जांच में इस तकनीकी खामी को नहीं सुधारा जा रहा है।
सॉफ्टवेयर के फेर में उलझीं परियोजनाएं
केस-1
हरहुआ में तीन वर्ष पहले 20 मंजिला इमारत वाली ग्रुप हाउसिंग के प्रस्ताव का नक्शा स्वीकृत कराने का आवेदन दिया गया। इसमें 400 फ्लैट बनाने का प्रस्ताव है। मगर, सॉफ्टवेयर और विभागीय पड़ताल के चक्कर में यह नक्शा अब तक स्वीकृति के इंतजार में है।
केस-2
अमरा चौराहे के पास अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 20 मंजिला ग्रुप हाउसिंग के नक्शे का आवेदन वर्ष 2020 में किया गया है। इसके लिए सभी विभागों की एनओसी भी मिल गई है। मगर, सॉफ्टवेयर और विभागीय पड़ताल में यह नक्शा अब तक स्वीकृत नहीं है।
केस-3
रामनगर में 24 मंजिला ग्रुप हाउसिंग के लिए नक्शा छह महीने पहले दाखिल किया गया है। अब तक इसका प्री डीसीआर ही स्वीकृत हुआ है और अब विभागीय पड़ताल होगी।
यह कहना गलत है कि नक्शे नहीं पास हो रहे हैं, हर महीने 100 नक्शे ऑनलाइन माध्यम से स्वीकृत हो रहे हैं। जिन नक्शों पर आपत्ति आती है उसकी सूचना मेल के जरिये आर्किटेक्ट और विकासकर्ता को दी जाती है। नियमों के अनुसार ही नक्शों के स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। -
पुलकित गर्ग, उपाध्यक्ष, वाराणसी विकास प्राधिकरण